कुचामन का किला

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कुचामन का किला, राजस्थान के नागौर में स्थित है। यह दुर्ग राजस्थान के सबसे पुराने दुर्गों में से है। यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है जैसे कि एक चील का घोंसला होता है । इसका निर्माण क्षत्रिय प्रतिहार वंश के महान प्रतिहार सम्राट नागभट्ट प्रथम ने 750 ईo में कराया।

गुर्जर प्रतिहार वंश के शासनकाल में ऐसे कई दुर्गों का निर्माण हुआ जिसमे मण्डौर, जालौर, कुचामन, कन्नौज, ग्वालियर के किले क्षत्रिय प्रतिहार राजाओं के अत्यधिक मात्रा में समृद्धि होने का प्रमाण देते हैं।

300 वर्षो तक अगर विदेशी अरबों की आंधी को रोकने का पूर्णतयः श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह केवल क्षत्रिय गुर्जर प्रतिहार वंश को है जिसने नागभट, वत्सराज, मिहिरभोज सम्राट , महेन्द्रपाल, महीपाल, जैसे वीर भारतीय योद्धा दिये। कुचामन का किला अपने प्रखर और भीमकाय परकोटो, 32 दुर्गों, 10 द्वारो और विभिन्न प्रतिरोधक क्षमता वाला किला है। यह एकमात्र अनोखी वास्तुकला वाला किला है। इस किले में जल संरक्षण और प्रबंधन के अच्छे इंतेजाम है। किले में कई भूमिगत टैंक आज भी विद्यमान है कुचामन किले में कई भूमिगत गुप्त ठिकाने, प्राचीन अंधकूप, कारागार हैं जिन्हें आज भी देखा जा सकता है। वर्तमान मे अब ये हेरिटेज होटल में तब्दील हो गया है और यहा बौलीवुड फिल्मो की सूटिंग होती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • (1) प्रतिहारों का मूल इतिहास लेखक - देवी सिंह मंडावा
  • (2) विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास लेखक - डा अनुपम सिंह
  • (3) परिहार वंश का प्रकाश लेखक - मुंशी देवी प्रसाद
  • (4) नागौद परिचय लेखक - जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी
  • (5) मण्डौर का इतिहास लेखक - श्री सिंह

इन्हें भी देखें[संपादित करें]