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क़िरात

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क़िरात : क़िरा (एकवचन) क़िरात (बहुवचन) : इस्लामी या कुरानी शब्दावली में इस का अर्थ "पढ़ना", "पाठ" या "पठन" है. क़ुरआन के पठन में शब्दों के विस्तार, स्वर और उच्चारण के संबंध में अलग-अलग नियम शामिल हैं.क़िरात इस्लामी अध्ययन की उस शाखा को भी संदर्भित करता है जो पाठ के तरीकों से संबंधित है।

*रस्म -- जिसको व्यंजन का शरीर (कंकाल) भी कहा जाता है. (उदाहरण काले वर्ण में) कुरान के सबसे पुराने जीवित अंशों में पाई जाने वाली एकमात्र लिपि थी। कुरान की अधिकांश विविधताएं जिनमें अलग-अलग रस्म थे, अहरुफ प्रकार में पाई गईं।.[1] [2] * हराकात या नुक़ाम अली'रब (नीले रंग में उदाहरण) अन्य स्वरों को इंगित करते हैं- लघु स्वर, संज्ञाकरण, ग्लोटल स्टॉप, लंबे व्यंजन। क़िरात के बीच भिन्नताओं में अधिकतर हरकत शामिल है.

सन्दर्भ

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  1. Cook, The Koran, 2000: pp. 72-73.
  2. Donner, "Quran in Recent Scholarship", 2008: pp. 35-36.