करीमनगर जिला

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करीमनगर जिला जिला

करीमनगर दक्षिणी भारतीय राज्य तेलंगाना का एक जिला है। यह राज्‍य की राजधानी हैदराबाद से 165 किलोमीटर दूर है। करीमनगर का नाम एक किलादार सयैद करीमुद्दीन के नाम पर पड़ा। यह शहर वेदों की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है जो प्राचीन काल से ही इस नगर की पहचान रही है। यहां के प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों में गोदावरी नदी सबसे महत्‍वपूर्ण है जो यहां की जिंदगी का एक अहम हिस्‍सा भी है। कई प्राचीन मंदिर इस जिले के अंतर्गत आते हैं जिनमें से मुक्‍तेश्‍वर स्‍वामी को समर्पित मंदिर सबसे अद्भुत है। भक्ति और शिक्षा की इस नगरी की सैर अपने आप में एक अनोखा अनुभव है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

राजाराजेश्‍वर मंदिर[संपादित करें]

करीमनगर से 38 किलोमीटर दूर वमुलावडा में भगवान राजाराजेश्‍वर स्‍वामी का प्रसिद्ध मंदिर है जहां दूर-दूर से लोग दर्शनों के लिए आते हैं। इस मंदिर का निर्माण चालुक्‍य राजाओं ने 750 ईसवी से 975 ईसवी के बीच करवाया था। मंदिर परिसर में श्री राम, लक्ष्‍मण, देवी लक्ष्‍मी, गणपति और भगवान पद्मनाथ स्‍वामी के मंदिर बने हुए हैं। एक और रोचक मंदिर है जो भगवान भीमेश्‍वर को समर्पित है। यहां पर कई खुले बरामदे हैं। इनमें से अद्दाला मंटप सबसे सुंदर है। मंदिर में स्थित धर्मकुंडम पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। लोगों का विश्‍वास है कि इस पानी में बीमारियों को ठीक करने की क्षमता है। सबसे पहले भक्‍त इस कुड में स्‍नान करते हैं उसके बाद दर्शन के लिए जाते हैं। मंदिर का एक अन्‍य आकर्षक मंदिर परिसर में स्थित दरगाह है जहां सभी धर्म व जातियों के लोग प्रार्थना करते हैं।

मंथानी[संपादित करें]

करीमनगर से 70 किलोमीटर दूर गोवावरी नदी के किनारे मंथानी स्थित है। यह स्‍थान प्राचीन समय में वेदिक अध्‍ययन का केंद्र था। आज भी यहां वेदों और संस्‍कृत की शिक्षा देने वाले अनेक स्‍कूल हैं। यहां बहुत सारे मंदिर हैं जिनमें से प्रमुख हैं भगवान शैलेश्‍वर, लक्ष्‍मीनारायण स्‍वामी, ओंकारेश्‍वर स्‍वामी और महालक्ष्‍मी मंदिर। मंथानी जैन और बौद्ध धर्म का मुख्‍य केंद्र भी है।

धुलिकट्टा[संपादित करें]

करीमनगर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धुलिकट्टा एक महत्‍वपूर्ण बौद्ध स्‍थान है। विश्‍वभर से अनेक बौद्धभिक्षु यहां आते हैं। सातवाहन काल के कई बौद्ध स्‍तूप यहां मिलते हैं। हर साल जनवरी के महीने में यहां सातवाहन उत्‍सव का आयोजन किया जाता है।

कोंडागट्टू[संपादित करें]

कोंडागट्टू करीम नगर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर अंजनेय स्‍वामी का अद्भुत मंदिर है। पहाडि़यों, घाटियों और झरनों के बीच स्थित कोंडागट्टू की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। स्‍थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण एक चरवाहे ने करीब 300 साल पहले किया था। वर्तमान मंदिर 160 साल पहले कृष्‍ण राव देशमुख ने बनवाया था। माना जाता है कि यदि कोई महिला इस मंदिर में 40 दिन पूजा करती है तो उसे संतान प्राप्ति होती है। इस मंदिर के अलावा यहां कोंडलार्य और बाजापोटना की गुफाएं दर्शनीय हैं।

रैकल[संपादित करें]

करीम नगर से 75 किलोमीटर दूर रैकल में केशवनाथ स्‍वामी का प्राचीन मंदिर है। 11वीं शताब्‍दी में काकतिय वंश द्वारा बनाए गए इस मंदिर की मूर्तियां बेहद खूबसूरत हैं। इसके अलावा यहां पंचमुखलिंगेश्‍वर स्‍वामी का अद्भुत मंदिर भी है। मंदिर में भगवान शिव की पंचानन प्रतिमा देखी जा सकती है। माना जाता है कि काशी की बाद यहीं पर शिवजी का यह रूप देखा जा सकता है। रैकल में भीमन्‍न का मंदिर है जिनके सम्‍मान में यहां हर साल जनवरी-फरवरी के महीने में तीन दिवसीय जात्रा आयोजित की जाती है।

मोलंगूर किला[संपादित करें]

करीमनगर से 30 किलोमीटर दूर सुनसान ग्रेनाइट पहाड़ी पर योजनाबद्ध तरीके इस मंदिर का निर्माण कराने का श्रेय काकतिय राजाओं को जाता है। महलों के अवशेष आज भी किले के गौरव की गवाही देते प्रतीत होते हैं।

कामेश्‍वरम[संपादित करें]

जंगलों से घिरा यह खूबसूरत स्‍थान करीमनगर से 130 किलोमीटर दूर है। यहां का मुक्‍तेश्‍वरा स्‍वामी को समर्पित प्राचीन मंदिर अपने अनोखेपन के कारण भक्‍तों को आकर्षित करता है। यहीं एकमात्र मंदिर है जहां एक ही आधार पर दो शिवलिंग मिलते हैं। बहुत से मंदिरों में से एक मंदिर ब्रह्मा जी को भी समर्पित जो एक अद्भुत बात है।

धर्मापुरी[संपादित करें]

करीमनगर से 78 किलोमीटर दूर गोदावरी नदी के किनारे बसा है 15वीं शताब्‍दी की मंदिर नगरी धर्मापुरी। जनश्रुतियों के अनुसार राजा बाली वर्मा ने यहां धर्म देवता यज्ञ किया था। वे चाहते थे कि उनके सभी लोग धर्म को मानें और उसके अनुसार आचरण करें। इस कारण इस गांव को धर्मपुरी कहा जाने लगा। भाषा अध्‍ययन, साहित्‍य, नृत्‍य और संगीत के क्षेत्र में यह गांव अहम स्‍थान रखता है। नगर के प्रमुख मंदिरों में 13वीं शताब्‍दी में बना श्री लक्ष्‍मी नरसिम्‍हा स्‍वामी मंदिर, श्री वैंकटेश्‍वर स्‍वामी मंदिर, श्री रामलिंगेश्‍वर स्‍वामी मंदिर (जहां शिव और विष्‍णु की प्रतिमा एक दूसरे के साथ हैं।) शामिल हैं। गोदावर इस स्‍थान के आकर्षण को और भी बढ़ा देती है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

हैदराबाद का बेगमपेट हवाई अड्डा नजदीकी हवाई अड्डा है।

रेल मार्ग

करीमनगर रेलवे स्‍टेशन आंध्र प्रदेश के सभी बड़े स्‍टेशनों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग

करीमनगर वारंगल से 80 किलोमीटर और हैदराबाद से 172 किलोमीटर दूर है। यहां से करीमनगर के लिए नियमित रूप से बसें चलती हैं।

मुख्यालय - करीमनगर क्षेत्रफल - 11,823 वर्ग कि.मी.

जनसंख्या - 34,914,822 (2001 जनगणना)

सन्दर्भ[संपादित करें]