कनेर

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Oleander
Nerium oleander in flower
Nerium oleander in flower
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
(अश्रेणिकृत) सपुष्पक
(अश्रेणिकृत) Eudicots
(अश्रेणिकृत) Asterids
गण: Gentianales
कुल: आपोकिनाकेऐ
प्रजाति: Nerium L.
जाति: N. oleander
द्विपद नाम
Nerium oleander (नेर्यूम् ओलेअन्देर्)
L.

कनेर का फूल बहुत ही मशहूर है। कनेर के पेड़ की ऊंचाई लगभग 10 से 11 हाथ से ज्यादा बड़े नही होते हैं। पत्ते लम्बाई में 4 से 6 इंच और चौडाई में 1 इंच, सिरे से नोकदार, नीचे से खुरदरे, सफेद घाटीदार और ऊपर से चिकने होते है। कनेर के पेड़ वन और उपवन में आसानी से मिल जाते है। फूल खासकर गर्मियों के मौसम में ही खिलते हैं फलियां चपटी, गोलाकार 5 से 6 इंच लंबी होती है जो बहुत ही जहरीली होती हैं। फूलों और जड़ों में भी जहर होता है। कनेर की चार जातियां होती हैं। सफेद, लाल व गुलाबी और पीला। सफेद कनेर औषधि के उपयोग में बहुत आता है। कनेर के पेड़ को कुरेदने या तोड़ने से दूध निकलता है। कनेर के पेड़ के बारे मे यह भी कहा जाता है की सांप इसके पेड़ के आस पास भी नहीं आता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

पीली कनेर - इसमेें पीले फूल लगते हैं तथा पत्तियों लम्बी व पतली होती हैं । पीली कनेर का दूध विषैला होता है और अधिकतर औषधि बनाने के लिए उपयोग किया जाता है । कनेर के बीज में जहर डाइगाक्सीन होता है जो दिल की धड़कन को कम करता है । भगवान शिव जी की कनेर के फूलों से पूजा करने से भक्त को सुन्दर वस्त्रों की इच्छा को पूरा करती है । कनेर (थिविलिया प्रवेनिया) सफेद कनेर के फूल का प्रयोग फेशियल एवं उबटन के रूप किया जाता है । कनेर के फूल को बेहद पवित्र माना जाता है । इसलिए यह आज भी विभिन्न धार्मिक स्ािलों में बहुतायत में पाया जाता है । वैसे तो कनेर का संपूर्ण पौधा विष युक्त होता है । इसके फल, मूल एवं बीज में ग्लाइकोसाइडो, नेरिओडोरिन एवं कैरोबिन , स्कापोलिन पाया जाता है । कनेर के पीले फूलों में पेरूबोसाइड भी होता है । डाॅ. माइकल एडलेस्टन (श्री लंका) का कहना है कि कनेर का एक बीज जान लेने के लिए काफी है । कनेर का जहर डाइगाक्सीन ड्रग की तरह है । डाइगाक्सीन दिल की धड़कन की रतार कम करता है । कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टेबलेट के बराबर होता है । पहले तो यह दिल की धड़कन को धीमा करता है और आखिरकार एकदम रोक देता है । डाइगाक्सीन के जहर के खिलाफ एंटीडाइगाक्सीन का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि यह महंगा है इस पर करीब तीन हजार डालर का खर्च आता है । .सफेद एवं लाल कनेर की पत्तियों का काढ़ा बनाकर घाव धोने से यह जल्दी भर जाता है । इसके पत्ते को पीस कर तेल में मिलाकर लेप करने से जोड़ों का दर्द दूर होता है । कनेर के पत्तों से सिद्ध तेल खुजली के लिए बनाया जाता है जो बहुत फायदेमंद होता है । ।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]