कछवाहा

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पूर्व जयपुर राज्य का पचरंग ध्वज। अंबर के राजा मान सिंह प्रथम द्वारा पचरंग (पांच रंगीन) ध्वज को अपनाने से पहले, कछवाहों के मूल ध्वज को "झारशाही (पेड़-चिह्नित) ध्वज" के रूप में जाना जाता था।
सिटी पैलेस, जयपुर में चंद्रमहल, जिसे कछवाहा राजपूतों ने बनवाया था।

कछवाहा भारत में राजपूत जाति की उपजाति है। कुछ परिवारों ने कई राज्यों और रियासतों पर शासन किया है जैसे अलवर, अंबर (जिसे बाद में जयपुर कहा जाने लगा) और मैहर

इस शब्द का उपयोग समान व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले कम से कम चार समुदायों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, जिनमें से सभी कुश के माध्यम से पौराणिक सूर्यवंश के वंश से होने का दावा करते हैं। कुश राम और सीता के जुड़वां बेटों में से एक थे। पहले यह लोग शिव और शक्ति की पूजा करते थे।[1]

मूल

आधुनिक काल के कछवाहा आम तौर पर विष्णु के अवतार राम के पुत्र कुश के वंशज होने का दावा करते हैं। यह सूर्यवंश राजवंश के होने के उनके दावे को दिखाने के लिए है लेकिन यह बीसवीं शताब्दी में विकसित उत्पत्ति का मिथक है।

शासक

एक कछवाहा परिवार ने अंबर पर शासन किया जिसे बाद में जयपुर राज्य के रूप में जाना जाने लगा और इस शाखा को कभी-कभी राजपूत कहा जाता है। उन्होंने 1561 में मुगल सम्राट अकबर से समर्थन मांगा था। तत्कालीन प्रमुख भारमल कछवा को औपचारिक रूप से एक राजा के रूप में मान्यता दी गई थी और मुगल सम्राट अकबर द्वारा मुगल कुलीनता में में शामिल किया गया था। नए गठबंधन को ठोस बनाने के लिए कछवाहा शासक ने अपनी बेटी का विवाह भी अकबर से कर दिया। एक राज्यपाल को भारामेल के क्षेत्र की देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था और इस क्षेत्र के राजस्व के एक हिस्से से उनको भुगतान किया जाता था।[2][3]

संदर्भ

  1. Pinch, William R. (1996). Peasants and monks in British India. University of California Press. पपृ॰ 12, 91–92. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-520-20061-6. अभिगमन तिथि 22 फ़रवरी 2012.
  2. Wadley, Susan Snow (2004). Raja Nal and the Goddess: The North Indian Epic Dhola in Performance. Indiana University Press. पपृ॰ 110–111. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780253217240.
  3. Sadasivan, Balaji (2011). The Dancing Girl: A History of Early India. Institute of Southeast Asian Studies. पपृ॰ 233–234. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9789814311670.