ओम थानवी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
ओम थानवी
गाल पर हाथ रखे कैमरे से कुछ हटकर किनारे की ओर देखते एक व्यक्ति की क्लोज अप तस्वीर
एक सम्मेलन के दौरान थानवी, 2012
जन्मफलोदी, जोधपुर जिला, राजस्थान, भारत
व्यवसायपत्रकार, सम्पादक
भाषाहिंदी
निवासदिल्ली राजधानी क्षेत्र
राष्ट्रीयताभारतीय
शिक्षास्नातकोत्तर (व्यवसाय प्रशासन)
विधासंस्मरण, समालोचना
विषयहड़प्पा संस्कृति
उल्लेखनीय कार्यमुअनजोदड़ो
अपने अपने अज्ञेय
उल्लेखनीय सम्मानबिहारी पुरस्कार, के.के. बिड़ला फाउंडेशन
शमशेर सम्मान
सार्क सम्मान
हिंदी अकादमी सम्मान
सक्रिय वर्ष1977-अबतक

ओम थानवी हिंदी भाषा के लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, संपादक तथा आलोचक हैं।[1] थानवी वर्तमान में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के संस्थापक-कुलपति हैं[1][2] इससे पूर्व हिंदी के प्रमुख दैनिक अख़बार जनसत्ता के संपादक रह चुके हैं। इनकी चर्चित कृति संस्मरण विधा में लिखी गयी किताब "मुअनजोदड़ो" है।

जीवन[संपादित करें]

ओम थानवी का जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी नामक क़स्बे में हुआ। इनके पिता एक शिक्षाशास्त्री और प्रतिष्ठित शैक्षिक पत्रिकाओं शिविरा पत्रिका और नया शिक्षक/टीचर टुडे के संपादक थे।

पत्रकारिता एवं संपादन[संपादित करें]

तैंतालीस वर्षों के पत्रकार-जीवन में श्री थानवी ने लेखक, वक्ता और विचारक की ख्याति अर्जित की है। उनकी रुचि के क्षेत्रों में मीडिया के साथ साहित्य, कला, संस्कृति, रंगमंच और सिनेमा से लेकर इतिहास, नृतत्त्वशास्त्र, समाज विज्ञान और पर्यावरण तक शामिल हैं।

श्री थानवी ने पत्रकारिता की शुरुआत 1977 में बीकानेर में छात्र जीवन के दौरान की। व्यवसाय प्रशासन में एमकॉम करने के बाद वे 1980 में जयपुर से निकलने वाले पत्रिका समूह से जुड़े। साप्ताहिक इतवारी पत्रिका और फिर राजस्थान पत्रिका के बीकानेर संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी रहने के बाद 1989 में इंडियन एक्सप्रेस समूह से जुड़ते हुए जनसत्ता के स्थानीय संपादक होकर चंडीगढ़ चले गए। दस साल बाद दिल्ली में कार्यकारी संपादक के रूप में जनसत्ता के सम्पूर्ण संपादन का ज़िम्मा संभाला। 16 वर्षों के संपादन काल में उन्होंने इस प्रतिष्ठित समाचार पत्र के उच्च मानकों की विरासत को समृद्ध किया।

नैतिक मूल्यों के साथ भाषा और साहित्य के अनुराग और समाज, राजनीति और संस्कृति से प्रतिबद्ध सरोकार ने जनसत्ता की अलग बौद्धिक पहचान बनाई। छब्बीस साल बाद 2015 में श्री थानवी जनसत्ता से सेवानिवृत हुए। फिर कुछ समय के लिए विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़ में पत्रकारिता का अध्यापन किया। हरिदेव जोशी विश्वविद्यालय आरम्भ करने से पहले वे दिल्ली में राजस्थान पत्रिका के सलाहकार संपादक भी रहे।

मीडिया के विभिन्न रूपों — पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो-टीवी, ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया आदि — को उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है। सम-सामयिक मुद्दों के अलावा उन्होंने भाषा, साहित्य, कला, सिनेमा, पुरातत्त्व, वास्तुशिल्प आदि पर भी महत्त्वपूर्ण लेख लिखे हैं।

अकादमिक उन्मुखता

श्री थानवी ने देश और विदेश की अनेक विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थाओं में पत्रकारिता, भाषा, पर्यावरण और अन्य विषयों पर व्याख्यान दिए हैं। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,  जामिया मिल्लिया इस्लामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, गुलबर्गा विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, तोक्यो विश्वविद्यालय (जापान), जगेलोनियन विश्वविद्यालय (पोलैंड), भारतीय विद्याभवन, न्यूयॉर्क और एशियाटिक सोसाइटी, कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

वैचारिक सहभागिता

वैचारिक आयोजनों में श्री थानवी निरंतर शिरकत करते आए हैं। उन्होंने साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन के दिल्ली, काबुल, कोलंबो, कॉक्स बाज़ार (बांग्लादेश), काठमांडू और लाहौर में आयोजित हुए सम्मेलनों में हिस्सा लिया। पैनोस साउथ एशिया द्वारा नगरकोट (नेपाल), बेलाज्जो (इटली), इस्तांबुल (तुर्की) और ब्रसल्स (बेल्जियम) में आयोजित संपादकों के सम्मेलनों, विश्व संपादक फोरम और विश्व समाचार-पत्र संगठन द्वारा हैदराबाद में आयोजित संपादक सम्मेलन, एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, पैनोस और ब्रिटिश उच्चायोग के संयुक्त तत्वावधान में चेन्नई में आयोजित मीडिया, जनहित और नियमन संगोष्ठी और देश-विदेश में सार्क लेखक फाउंडेशन के विभिन्न संवादों भागीदारी की है। वे प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं पर डैड-सी (जॉर्डन) में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) और अदीस अबाबा (इथियोपिया) में विकास के लिए वित्त विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित संगोष्ठी में भी संभागी रहे। देश की शीर्ष ख्यातनाम संस्थाओं यथा गांधी शांति प्रतिष्ठान (जीपीएफ), विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस), साहित्य अकादेमी, केंद्रीय हिंदी संस्थान, भारतीय भाषा परिषद, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान (एफटीआईआई), पीयूसीएल, सहमत और अनहद आदि के विमर्शों में भी विचार व्यक्त किए हैं।

पेशेवर भागीदारी

श्री थानवी मीडिया प्रतिनिधि के नाते पर्यावरण, समाज विज्ञान और कला-संस्कृति पर दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों में गए हैं। अनेक अहम आयोजनों की रिपोर्टिंग और समालोचना की है। विशेष रूप से उन्होंने 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जलवायु परिवर्तन पर रियो द जनेरो (ब्राज़ील) में आयोजित प्रथम पृथ्वी-सम्मेलन और उस धारा में कोपेनहेगन (डेनमार्क), कानकुन (मैक्सिको), डरबन (द. अफ़्रीका), दोहा (कतर), वारसा (पोलैंड), लीमा (पेरू), पेरिस, माराकेश (मोरक्को), बॉन (जर्मनी) और कातोवित्से (पोलैंड) में हुए पर्यावरण सम्मेलनों में शिरकत की। मुंबई, ट्यूनिस (ट्यूनीशिया) और हेलसिंकी (फिनलैंड) में आयोजित विश्व सामाजिक मंच (डब्लूएसएफ) के सम्मेलनों और भोपाल, न्यूयॉर्क और पारामारिबो (सूरीनाम) में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में भी हिस्सा लिया। वे साहित्य अकादेमी के प्रतिनिधिमंडल में हवाना (क्यूबा) के सांस्कृतिक सम्मेलन में गए। भारत के उपराष्ट्रपति के दल में बुख़ारेस्ट (रोमानिया), जॉर्जटाउन (गयाना), पोर्ट ऑफ़ स्पेन (त्रिनिदाद-टोबेगो), येरेवान (आर्मीनिया), मिंस्क (बेलारूस), पेरिस और लंदन आदि में आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। ब्रिटिश शासन के आमंत्रण पर संपादकों के समूह के साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड की यात्रा की। उन्होंने मिस्र, यूनान, चीन, हंगरी, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, मलेशिया, थाईलैंड, मॉरीशस, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड आदि देशों की भी यात्रा की है और अनेक संस्मरण लिखे हैं।[2]


कृतित्व[संपादित करें]

  • मुअनजोदड़ो - हड़प्पा सभ्यता के ऊपर विमर्शपरक किताब।
  • अपने-अपने अज्ञेय (सं.) - संस्मरण; अज्ञेय जन्मशती पर दो खंडों में स्मृतिग्रंथ।

सम्मान[संपादित करें]

पत्रकारिता के लिए थानवी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रसिद्ध कृति 'मुअनजोदड़ो' के लिए इन्हें शमशेर सम्मान, सार्क लिटरेरी एवार्ड, तथा बिहारी पुरस्कार प्राप्त हुआ।[3][4][5]

अन्य सम्मान:

  • हिंदी अकादमी अवार्ड
  • हल्दीघाटी एवार्ड
  • माधवराव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "लेखक ओम थानवी का व्यक्तित्व OM THANVI". Hindisamay.com. अभिगमन तिथि 2018-09-03.
  2. "वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी". Samachar4media.com. मूल से 3 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2018-09-03.
  3. Press Trust of India. "Bihari Puraskar for writer-journalist Om Thanvi | Business Standard News". Business-standard.com. मूल से 3 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2018-09-03.
  4. "'मुअनजोदड़ो' के लिए ओम थानवी को बिहारी पुरस्कार - bihari puraskar for writer journalist om thanvi - AajTak". Aajtak.intoday.in. 2015-04-14. मूल से 3 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2018-09-03.
  5. vanson (2015-04-18). "Bihari Puraskar for writer journalist Om Thanvi in Hindi". Jagranjosh.com. मूल से 3 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2018-09-03.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]