मित्रक तारा

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नरतुरंग तारामंडल में मित्रक तारा (उर्फ़ "बेटा सॅन्टौरी") और मित्र तारा (उर्फ़ "अल्फ़ा सॅन्टौरी") - मित्र तारा मित्रक की तरफ़ जा रहा है और सन् 6048 में उस से अगली तरफ़ चला जाएगा

मित्रक या बेटा सॅन्टौरी, जिसका बायर नाम β Centauri या β Cen है और जिसे हदर के नाम से भी जाना जाता है, नरतुरंग तारामंडल का दूसरा सब से रोशन तारा है।[1] यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से दसवा सब से रोशन तारा भी है। तारों के श्रेणीकरण के हिसाब से इसे "B1 III" की श्रेणी दी जाती है।

तीन तारे[संपादित करें]

सन् 1935 में जोन वूट नामक खगोलशास्त्री ने ख़ुलासा किया के मित्रक वास्तव में एक दोहरा तारा है (यानि दो तारे हैं जो पृथ्वी से एक तारा लगते हैं)। बाद में पता चला के इन दोनों तारों में से मुख्य तारा ("मित्रक ए" या "हदर A") वास्तव में स्वयं द्वितारा है, यानि के कुल मिलकर यह तीन तारों का झुण्ड है। "मित्रक ए" के दो तारे एक दूसरे की एक परिक्रमा हर 357 दिनों में पूरी कर लेते हैं। इन तारों का ब्यौरा कुछ इस तरह है -

  • मित्रक ए (द्वितारा) - इसका द्रव्यमान (मास) सूरज के द्रव्यमान का 10.7 गुना, व्यास (डायमीटर) सौर व्यास का 8 गुना और चमक सूरज की चमक की 16,000 गुना है।
  • मित्रक बी - इसका द्रव्यमान सूरज के द्रव्यमान का 10.3 गुना, व्यास सूरज के व्यास का 8 गुना और चमक सूरज की चमक की 15,000 गुना है।

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

मित्रक के दो अन्य पारम्परिक नाम हैं -

  • "हदर", जो अरबी भाषा के "अल​-अर्थ़" (أل أرض) से है - ध्यान रहे के इसमें "थ़" की ध्वनी का उच्चारण "थ" और "ज़" दोनों से भिन्न है और उन दोनों के लगभग बीच की ध्वनी है। "अल​-अर्थ़" का मतलब "ज़मीन", "धरती" या "मिटटी" होता है।
  • "अजॅना" (Agena) जो लातीनी भाषा से आया है और जिसका अर्थ "घुटना" (शरीर की टांग वाला घुटना) है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Indian journal of history of science: Volume 42, National Commission for Compilation of History of Sciences in India, Indian National Science Academy, National Institute of Sciences of India, 2007, "... stars a Centauri and beta Centauri are known as Mitra and Mitrak respectively ..."