प्राकृतिक खेती

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प्राकृतिक खेती के प्रवर्तक मसानोबू फुकुओका

प्राकृतिक खेती जापान के किसान एवं दार्शनिक फुकुओका (1913–2008) द्वारा स्थापित कृषि की पर्यावरणरक्षी पद्धति है। फुकुओका ने इस पद्धति का विवरण जापानी भाषा में लिखी अपनी पुस्तक 'सिजेन नोहो' ( 自然農法 / shizen nōhō) में किया है। इसलिए कृषि की इस पद्धति को 'फुकुओका विधि' भी कहते हैं। इस पद्धति में 'कुछ भी न करने' की सलाह दी जाती है जैसे जुताई न करना, गुड़ाई न करना, उर्वरक न डालना, कीटनाशक न डालना, निराई न करना आदि।

भारत में खेती की इस पद्धति को 'ऋषि खेती' कहते हैं।

सिद्धान्त[संपादित करें]

फुकुओका ने प्राकृतिक खेती को निम्नलिखित पाँच सूत्रों में बाँध दिया है-

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]