तैमूरी राजवंश

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अपने चरम पर तैमूरी साम्राज्य

तैमूरी राजवंश (फ़ारसी: تیموریان, तैमूरियान), जो स्वयं को 'गुरकानी राजवंश' (گوركانى) कहते थे, मध्य एशिया और उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के विस्तृत इलाक़ों पर राज करने वाला तुर्की-मंगोल नस्ल का एक सुन्नी मुस्लिम वंश था। अपने चरम पर इसके साम्राज्य में समस्त ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और उज़बेकिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान, उत्तर भारत, आनातोलिया, कॉकस और मेसोपोटामिया के बड़े भूभाग शामिल थे। इस राजवंश की नीव १४वीं शताब्दी ईसवी में तैमूरलंग नामक आक्रामक और विजेता ने रखी थी।[1] १६वीं सदी में उज़बेकिस्तान की फ़रग़ना वादी से भारत पर आक्रमण करके मुग़ल सलतनत की स्थापना करने वाला बाबर भी इसी तैमूरी राजवंश का हिस्सा था। क्योंकि तैमूरलंग को अक्सर 'अमीर तैमूर' कहा जाता था इसलिए इस राजघराने के वंशज अपने नामों में अक्सर 'मिर्ज़ा' जोड़ लिया करते थे जो 'अमीरज़ादा' (यानि 'अमीर का पुत्र') का संक्षिप्त रूप है।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Timurids in transition: Turko-Persian politics and acculturation in Medieval Iran, Maria Subtelny, BRILL, 2007, ISBN 978-90-04-16031-6
  2. Central Asian heritage in the Mughal polity, Mansura Haidar, Mukhtar Ahmad Ansari, Department of History, Jamia Millia Islamia (India), Aakar Books, 2003, ISBN 978-81-87879-11-4, ... Mirza Abdul Qadir explains the term 'Mirza' as superior to the status of 'shahzada' since the word Mirza is an abbreviation of amirzada ...