तुर्की-मंगोल

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मुग़ल आक्रमणों से पूर्व का यूरेशिया, क़रीब १२०० ईसवी की स्थिति

तुर्की-मंगोल (Turco-Mongol) मध्य एशिया के स्तेपी इलाक़े में रहने वाले विविध ख़ानाबदोश लोगों को दिया जाने वाला नाम था जो मंगोल साम्राज्य के अधीन थे। समय के साथ-साथ उनकी भाषा और पहचान में गहरी तुर्की छाप आ गई।[1] इन लोगों ने मध्यकाल में बहुत से बड़े राज्य बनाए, जिनमें इलख़ानी साम्राज्य, चग़ताई ख़ानत, सुनहरा उर्दू, क़ाज़ान ख़ानत, नोगाइ ख़ानत, क़्राइमियाई ख़ानत, तैमूरी राजवंश और मुग़ल साम्राज्य शामिल हैं।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Mongols and Mamluks: The Mamluk-Ilkhanid War, 1260-1281, Reuven Amitai-Preiss, Cambridge University Press, 2005, ISBN 978-0-521-52290-8, ... The flexible nature of Turco-Mongolian tribal society made possible both the rapid construction of larger tribal entities and the absorption of foreign nomadic groups ...
  2. Mughal gardens: sources, places, representations, and prospects, James L. Wescoat, Dumbarton Oaks, Arthur M. Sackler Gallery (Smithsonian Institution), Dumbarton Oaks, 1996, ISBN 978-0-88402-235-0, ... the dynasty's ideological foundations remained deeply tied to Turco-Mongol traditions and would always be honored and preserved on that basis ...