कनॉट प्लेस (आधिकारिक रूप से राजीव चौक) दिल्ली का सबसे बड़ा व्यवसायिक एवं व्यापारिक केन्द्र है। इसका नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। इस मार्केट का डिजाइन डब्यू एच निकोल और टॉर रसेल ने बनाया था। यह मार्केट अपने समय की भारत की सबसे बड़ी मार्केट थी। अपनी स्थापना के ६५ वर्षों बाद भी यह दिल्ली में खरीदारी का प्रमुख केंद्र है। यहां के इनर सर्किल में लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्त्रां और बार हैं। यहां किताबों की दुकानें भी हैं, जहां आपको भारत के बारे में जानकारी देने वाली बहुत अच्छी किताबें मिल जाएंगी।
निर्माण से पहले यह क्षेत्र एक कटक (रिज) था, जिसमें कीकर के पेड़ लगे रहते थे। यह वन्य इलाका जंगली शूकरों, गीदड़ जैसी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास था, यहाँ कश्मीरी गेट, सिविल लाइन्स इलाके के निवासी सप्ताहान्तों में तीतरों के शिकार के लिए आया करते थे।[1] इसके अलावा यहाँ स्थित प्राचीन हनुमान मन्दिर के दर्शन करने दीवालघिरे शहर से लोग, मंगलवारों और शनिवारों को आया करते थे, जो सूर्यास्त से पहले ही आया करते थे क्योंकि उन दिनों वह मार्ग रात को गुजरने के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता था।[1] बाद में माधोगंज, जयसिंहपुरा और राजा का बाज़ार जैसे गाँवों के निवासियों से क्षेत्र खाली करवाकर कनाट प्लेस व निकटस्थ इलाके बनाये गये। यहाँ के लोगों को करोल बाग (पश्चिम को) स्थानांतरित किया गया, जो उस समय खुद एक पथरीला इलाका था और वहाँ पेड़ तथा जंगली झाड़ियाँ थीं।[2]
यहां कुल बारह (१२) ब्लॉक्स या खण्ड हैं:-
- ए ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- बी ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- सी ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- डी ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- ई ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- एफ ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- जी ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- एच ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- आई ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- जे ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- के ब्लॉक, कनॉट प्लेस
- एल ब्लॉक, कनॉट प्लेस
दिल्ली के अन्य व्यवसायिक स्थल:
- ↑ गलती उद्घृत करें:
<ref> का गलत प्रयोग; ht नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
- ↑ “A tale of two cities”, Hindustan Times, 1 September 2011।