इटावा

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इटावा
—  जिला  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला इटावा
महापौर कुलदीप गुप्ता संटू
सांसद रघुराज सिंह शाक्य
जनसंख्या
घनत्व
२१०,४५३ (२००१ के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
२४३४ कि.मी²
• १४५ मीटर
आधिकारिक जालस्थल: http://etawah.nic.in/

Erioll world.svgनिर्देशांक: 26°47′12″N 79°01′19″E / 26.786686°N 79.022056°E / 26.786686; 79.022056

इटावा भारत के उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह दिल्ली-कलकत्ता राष्ट्रीय राजमार्ग २ पर स्थित है। इटावा शहर, पश्चिमी मध्य उत्तर-प्रदेश राज्य के उत्तरी भारत में स्थित है। इटावा आगरा के दक्षिण-पूर्व में यमुना (जमुना) नदी के तट पर स्थित है। इस शहर में कई खड्ड हैं। जिनमें से एक पुराने शहर (दक्षिण) को शहर (उत्तर) से अलग करता है। पुल और तटबंध, दोनों हिस्सों को जोड़ते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

इटावा में 16वीं शताब्दी में निर्मित जामी मस्जिद है, जिसका निर्माण एक ऊँचे आधार पर पुराने हिन्दू भवनों के अवशेषों से किया गया है। यहाँ हिन्दू मंदिरों से घिरे 15वीं शताब्दी के एक क़िले के अवशेष भी हैं। इटावा का पुराना नाम इष्टिकापुर कहा जाता है। हिन्दी के प्रसिद्ध कवि देव इटावा निवासी थे। उन्होंने स्वयं ही लिखा है- 'द्यौसरिया कविदेव को नगर इटावी वास।'

यातायात और परिवहन[संपादित करें]

वायु मार्ग[संपादित करें]

इटावा का सबसे निकटतम हवाई अड्डा आगरा और ग्वालियर में हैं।

रेल मार्ग[संपादित करें]

इटावा रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त इटावा ज़िले में अन्य 6 रेलवे स्टेशन सराय भूपत (8 किलोमीटर), जसवंतनगर (16 किलोमीटर), बलराय (26 किलोमीटर), एकदिल (10 किलोमीटर), समहो (28 किलोमीटर) और भरथना (19 किलोमीटर) स्थित है।

सड़क मार्ग[संपादित करें]

भारत के कई प्रमुख शहरों से इटावा सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। इटावा ज़िला ग्वालियर, आगरा, फर्रूखाबाद, मैनपुरी, कानपुर और जालौन आदि से सड़क मार्ग द्वारा पूरी तरह से जुड़ा हुआ है।

उद्योग और व्यापार[संपादित करें]

इस शहर में कपास और रेशम बुनाई के महत्त्वपूर्ण उद्योग व तिलहन मिलें हैं। जिले में धान मिलें भी बहुत बड़ी संख्या में हैं। इटावा घी का वितरण केंद्र भी है।

कृषि और खनिज[संपादित करें]

इटावा यमुना और इसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित जलोढ़ भूभाग पर स्थित है और इस क्षेत्र की सिंचाई गंगा नहर प्रणाली की एक नहर द्वारा होती है। यहाँ की फ़सलों में गेहूँ, मकई, जौ और मोटा अनाज शामिल हैं। विशालकाय खड्डों के इस क्षेत्र में नदियों के किनारे मिट्टी के अपरदन की समस्या भी रहती है। पुनर्ग्रहण और कर लगाने संबंधी परियोजनाओं से कुछ भूमि वापस पाने में सहायता मिली है।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

इटावा के शिक्षण संस्थानों में गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, एच. एम. एस. इस्लामिया इंटर कॉलेज और के. के. महाविद्यालय शामिल हैं।

  • SMGi

पर्यटन[संपादित करें]

सुमेर सिंह का किला, चम्बल, जुगरामऊ गांव, टैक्सी मंदिर, बाबरपुर, बकेवर, चकरनगर, जसौहारन, अहीरपुर, प्रताप नगर और सरसईनावर आदि यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी इटावा काफ़ी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इटावा की जामा मसजिद प्राचीन बौद्ध या हिंदू मंदिर के खंडहरों पर बनाई गई मालूम होती है। भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुकमणी का मायका कुन्दनपुर जो की वर्तमान में कुदरकोट के नाम से जाना जाता है इसी जिले में है।

साहित्यकार[संपादित करें]

जुगरामऊ गांव[संपादित करें]

जुगरामऊ (JUGRAMAU) : ऐसा माना जाता है कि इटावा में अगर कोई सबसे ज्यादा सुन्दर और देखने लायक स्थान है तो वह जुगरामऊ गांव हैं लगभग 1930 ईo में बसा यह गांव, न्यू मण्डी के समीप और भोगनीपुर नहर के किनारे स्थित है और यहां एक प्राचीन और पवित्र हनुमान मंदिर है इस मंदिर में दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतों को लेकर आते हैं और मन्नत पूरी होने पर वे मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं, गांव के तीन दिशाओं के किनारे समुद्र की भांति तालाबों से घिरा हुआ है गाँव में लगभग 2150 जनसंख्या की आबादी है और लगभग 75% लोग शिक्षित है, गांव में एक क्रिकेट का हरा-भरा मैदान भी है जो कुछ समय पहले तेज वारिस के कारण ध्वस्त है इस मैदान को shibu saren cricket club के नाम से जाना जाता है जहां पर गांव के एंव बाहर के लोग क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आते हैं नहर के किनारे हरे-भरे पेड़ों के बीच स्थित यह मैदान अपने आप में एक मिसाल कायम करता है। इस गांव को शोशल मीडिया से भी जोड़ा गया है आप ट्विटर पर इसे फॉलो कर सकते हैं twitter.com/jugramau & Facebook.com/page/jugramau

  • हनुमान मंदिर:

गांव के किनारे स्थित यह हनुमान मंदिर काफी समय से मशहूर है कहा जाता है कि बहुत समय पहले एक बैलगाड़ी इस गांव से गुजर रही थी जिसमें हनुमान जी की मूर्ति रखी हुई थी, मूर्ति अपने आप जमीन पर गिर पड़ी.. बहुत कोशिशों के बाद भी वह अपनी जगह से नहीं हिली और लोगों ने वहां पर ही मंदिर का निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इस तरह से इस मंदिर का निर्माण किया गया है और प्राचीन समय से ही इस मंदिर में बूढ़ा मंगल के दिन मेले का आयोजन किया जाता है और आज भी वह मेला काफी मशहूर है

  • shibu saren cricket club :

ये मैदान नहर के किनारे हरे-भरे गगनचुंबी पेड़-पौधों के बीच स्थित है और ये पूरा मैदान रेव (बलुई मिट्टी) से निर्मित है, मैदान काफी बड़ा तो नहीं है लेकिन इस मैदान की खूबसूरती देखते बनती है 10-10-2003 में इस क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट के लिए चुना गया, जिसमें 7 क्रिकेट टीमों ने हिस्सा लिया था लेकिन लगातार 30 घण्टे की घनघोर बारिश ने ये सपना जुगरामऊ वासियों से छीन लिया, और वह टूर्नामेंट जेoके हॉस्पिटल ग्राउण्ड पर किया गया।

  • जुगरामऊ क्रिकेट टीम (JCT)

JCT का इतिहास काफी पुराना है 1998 में टीम का नेतृत्व आनन्द गोयल के हाथों में था और टीम काफी तेज़ तर्रार थी। आनन्द के साथ उनके परिवार केे चार लोग भी टीम का हिस्सा थे

  • नेहरू पॉइंट

गांव के किनारे स्थित नहर के पास काफी सुन्दर जगह है जो नेहरू पॉइंट के नाम से मशहूर है, पर्यटकों को ये जगह काफी पसंद आती है, नेहरु पॉइन्ट को ये नाम, 9-9-14 को दिया गया via Rahul kumar

  • गांव का परिचय

गांव के प्रधान श्री लाखन सिंह कुशवाह जी काफी समय से गांव के लिए अपना योगदान देते आ रहे हैं गांव में सात जाति के लोग हैं