अझ़दहा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
ताइवान के लॉन्गशान मंदिर के ऊपर अझ़दहे की आकृति
बीजिंग की "नौ अझ़दहों की दीवार" पर शाही अझ़दहों की आकृतियाँ (जिनके पंजों में पाँच नाखून होते हैं)
इटली के रेजियो कालाब्रिया राष्ट्रीय संग्राहलय की दीवार पर पच्चीकारी से बनी एक अझ़दहे की आकृति

अझ़दहा, अज़दहा, या ड्रैगन एक काल्पनिक जीव है जिसमें सर्प की प्रकृति के बहुत से तत्व थे और कुछ संस्कृतियों में उड़ने और मुंह से आग उगलने की क्षमता भी थी। यह दुनिया की कई संस्कृतियों के मिथकों में पाया जाता है। कभी-कभी इस जीव को अजगर भी बुलाया जाता है, हालांकि यह थोड़ा सा ग़लत है क्योंकि "अजगर" उस सर्प का हिंदी नाम है जिसे अंग्रेज़ी में "पायथन" (python) कहते हैं।

शब्द की उत्पत्ति[संपादित करें]

अझ़दहा में "झ़" का उच्चारण "ज़" और "झ" दोनों से भिन्न है और यह हिंदी-उर्दू के बहुत कम शब्दों में से है जिसमें यह ध्वनि पाई जाती है। वैसे तो यह शब्द फ़ारसी से उत्पन्न हुआ समझा जाता है लेकिन इसकी संस्कृत में भी गहरी सजातीय जड़े हैं जो संस्कृत और कश्मीरी समेत उत्तर भारत की सभी भाषाओँ की पूर्वज प्राचीन आदिम हिन्द-ईरानी भाषा तक पहुँचती हैं। संस्कृत का "अहि" शब्द भिन्न रूपों में बहुत सी हिन्द-ईरानी भाषाओँ में पाया जाता है, और "अझ़ि" या "अज़ि" इसी का रूप है। अहि/अझ़ि/अज़ि का अर्थ होता है "सर्प" और यह "अहिरावण" जैसे शब्दों में मिलता है। "दहाक" का अर्थ "काटना" या "डंक मारना" होता है।[1][2]

अंग्रेज़ी में इसी कालपनिक जीव को "ड्रैगन" (Dragon) कहते हैं जो यूनानी भाषा के द्राकोन (δράκων) शब्द से आया है, जिसका अर्थ है "एक बड़े आकार का सर्प, विशेषकर जल में रहने वाले सर्प।"

भारतीय संस्कृति में[संपादित करें]

प्राचीन वैदिक धर्म में वृत्र (जिसका अर्थ है "ढकने वाला") एक असुर भी था और एक नाग भी। माना जाता है कि यह संभवतः एक अझ़दहा के ही जैसा जीव था। यह इन्द्र का शत्रु और सूखे (जल की कमी) का प्रतीक था।[3] इसे वेदों में "अहि" (यानि सर्प) भी कहा गया है, और कुछ वर्णनों में इसके तीन सर दर्शाए गए हैं।[4]

आधुनिक भारतीय साहित्य में भी अझ़दहा को कभी ख़तरे और कभी साहस के प्रतीक के रूप में प्रयोग किया गया है। हरिवंश राय बच्चन ने अपने "दो चट्टानें" नाम के संग्रह की प्रसिद्ध कविता "सूर समर करनी करहिं" में अझ़दहा को एक ज़ुल्म ढाने वाला और सच्चाई के तर्क के प्रति बहरा पात्र दिखाया है जिस से केवल बल के प्रयोग से बात की जा सकती है:

और ऐसा अज़दहा जब सामने हो, कान ही जिसके न हों तो,
गीत गाना - हो भले ही वीर रस का वह तराना - गरजना, नारा लगाना,
शक्ति अपनी क्षीण करना, दम घटाना।
बड़ी मोटी खाल से उसकी सकल काया ढकी है।
सिर्फ़ भाषा एक जो वह समझता है, सबल हाथों की, करारी चोट की है।[5]

यूरोपीय संस्कृति में[संपादित करें]

यूरोपीय अझ़दहे अक्सर परों वाले होते हैं और क्रोधित होकर अपने मुँह से आग के गोले फेंक सकते हैं। इनका शरीर एक भीमकाय सांप की तरह होता है और आगे छिपकली की तरह दो टाँगे होती हैं। बिना टांगों वाले अझ़दहे को वायवर्न (wyvern) कहा जाता है। प्राचीन कथाओं में अक्सर अझ़दहों को ग़ुफाओं में रहने वाला जीव बताया जाता है। प्राचीन अंग्रेज़ी भाषा की बियोवुल्फ़ (Beowulf) नामक कविता में ऐसे ही अझ़दहों का वर्णन है। कभी-कभी इन्हें किसी बड़े ख़ज़ाने की रखवाली करते हुए भी बताया जाता है।

चीनी संस्कृति में[संपादित करें]

चीनी अझ़दहे, जिन्हें "लॉन्ग" (龍) कहा जाता है, मनुष्यों का रूप धारण कर सकते हैं और उन्हें कृपालु जीवों के रूप में दर्शाया जाता है। पाँच नाखूनों के पंजे वाले अझ़दहे को चीनी सम्राटों का चिन्ह माना जाता था। कला के क्षेत्र में चीनी संस्कृति में अझ़दहों का बहुत प्रयोग होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Charudeva Shastri felicitation volume, Charudeva Shastri, Suniti Kumar Chatterji, Charu Deva Shastri Felicitation Committee, 1974, ... The first component Azhi —, Skt. ahi — Greek othis means a snake and Dahaka — biter, stinger ... Skt। ... to bite, to sting. The full name survives in Persian as azhdaha, a python, a great snake. Only the second component ...
  2. Journal, Volumes 3-4, Uttar Pradesh Historical Society, ... Ahi or Ahika in Sanskrit is a snake. Ascoli identifies Ahi with Greek echis (not ophis) and Zend azhi. Ahi was used as a proper name, like Nahir, lion and Vyaghra, tiger, as we see in the name of the legendary Raja Ahi Baran ...
  3. दयानंद यजुर्वेदभाष्य भास्कर: महर्षि दयानंद के वेद-भाष्य, सुदर्शनदेव आचार्य, दयानंद सरस्वती, आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट, १९७४
  4. The Dragon Keeper's Handbook: Including the Myth and Mystery, Care and Feeding, Life and Lore of These Fiercely Splendid Creatures, Shawn MacKenzie, Llewellyn Worldwide, 2011, ISBN 978-0-7387-2785-1, ... In Vedic India we find three-headed Vritra, a divine Chaos Dragon and, some would argue, a descendent of Tiamat; certainly a Dragon made in her wild mold. But where Tiamat was creative, Vritra was willfully destructive ...
  5. Do Chattanein, Harivansh Rai Bachchan, Rajpal & Sons, ISBN 978-81-7028-799-5