सिसैरा-संकलन

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
सिसैरा-संकलन

गणितीय विश्लेषण में, सिसैरो संकलन सामान्य अर्थों में अभिसरण नहीं करने वाले अनन्त संकलन को मान निर्दिष्ट करता है जो मानक संकलन के साथ सन्निपतित होता है यदि वह अभिसारी हो। सिसैरा संकलन श्रेणी के आंशिक संकलन के समान्तर माध्य के सीमान्त मान के रूप में परिभाषित होता है।

सिसैरा संकलन का नामकरण इतालवी विश्लेषक अर्नेस्टो सिसैरा (1859–1906) के सम्मान में रखा गया।

परिभाषा[संपादित करें]

माना {an} एक अनुक्रम है और माना

श्रेणी का kवाँ आंशिक संकलन है

श्रेणी सिसैरा योग के साथ सिसैरा संकलनीय कहलाती है यदि इसके आंशिक संकलनों के योग का माध्य , की ओर अग्रसर हो:

अन्य शब्दों में, किसी अनन्त श्रेणी का सिसैरा संकलन श्रेणी के प्रथम n आंशिक संकलनों का समान्तर माध्य (औसत) का सीमान्त मान होता है जबकि n अनन्त की ओर अग्रसर हो। यह सिद्ध किया जा सकता है कि अभिसारी श्रेणी सिसैरा संकलनीय होती है और श्रेणी का कुल योग सिसैरा संकलन के समान होता है। हालांकि, निम्नलिखित उदाहरण उल्लिखीत करता है कि श्रेणी अपसारी है लेकिन सिसैरा संकलनीय है।

उदाहरण[संपादित करें]

माना n ≥ 1 के लिए an = (−1)n+1 है। अर्थात {an} एक अनुक्रम है

और माना G एक श्रेणी को निरुपित करता है।

तब आंशिक संकलनों {sn} का अनुक्रम निम्नलिखित होगा

इस श्रेणी G को ग्रांडी श्रेणी के रूप में जाना जाता है जो अभिसारी नहीं है। अन्य रूप में, {sn} के पदों के (आंशिक) माध्य अनुक्रम {tn} है जहाँ

निम्न प्रकार हैं

अतः

इसलिए श्रेणी G का सिसैरा संकलन का मान 1/2 है।

अन्य रूप में, माना n ≥ 1 के लिए an = n है। अर्थात {an} एक अनुक्रम है।

और माना G एक श्रेणी को निरुपित करता है।

तब {sn} के आंशिक संकलनों का अनुक्रम

होगा और G का मान अनन्त की ओर अपसरित होगा।

{tn } के आंशिक संकलनों के माध्य के अनुक्रम के पद निम्न प्रकार होंगे:

अतः, यह अनुक्रम G की तरह अनन्त की ओर अपसरण करता है तथा अब G सिसैरा संकलनीय नहीं है।


ये भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Shawyer, Bruce; Watson, Bruce (1994), Borel's Methods of Summability: Theory and Applications, Oxford UP, ISBN 0-19-853585-6.
  • तित्चमार्श, एडवर्ड चार्ल्स (1948), फूरिये समाकल सिद्धांत का एक परिचय (Introduction to the theory of Fourier integrals) (2nd ed.), न्यूयॉर्क: Chelsea Pub. Co. (published 1986), ISBN 978-0-8284-0324-5.
  • वॉलकॉव, आई॰आई॰ (2001), "सिसैरा संकलन विधि (Cesàro summation methods)", in हेज़विंक्ल, मिच्येल, एन्साइक्लोपीडिया ऑफ़ मैथमैटिक्स, स्प्रिंगर, ISBN 978-1-55608-010-4
  • जयगमुंड, अंटोनी (1968), त्रिकोणमितीय श्रृंखला (Trigonometric series) (2nd ed.), कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस (published 1988), ISBN 978-0-521-35885-9.