सिरसा जिला

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सिरसा
—  जिला  —
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य हरियाणा
ज़िला सिरसा
जिलाधीश
नगर पालिका अध्यक्ष

सिरसा हरियाणा का एक जिला है। इसका मुख्यालय है सिरसा है।

सितंबर 1975 को हरियाणा के प्रथम जिले के रूप में अस्तित्व में आया सिरसा नगर बठिंडा-रेवाड़ी पर रेलमार्ग पर तथा दिल्ली-फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 पर स्थित है। हरियाणा के पश्चिम छोर पर बसा, पंजाब और राजस्थान की सीमाओं से सटा यह शहर मुक्तसर व बठिंडा (पंजाब) तथा गंगानगर और हनुमानगढ़ (राजस्थान) तथा हरियाणा के फतेहाबाद और हिसार जिलों के साथ लगता है। भौगोलिक दृष्टि से इसकी स्थिती अक्षांश में 29.53 तथा दक्षांश में 75.02 है तथा यह जिला 4276 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से 252 किलोमीटर दूर है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के मुख्य शहरों से इसकी दूरी निम्मलिखित तालिका में दिखाई गई है।

तहसीलें : सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, कालांवाली। उप तहसीलें : कालांवाली, नाथूसरी चौपटा, चौटाला। उपमंडल : सिरसा, डबवाली ऐलनाबाद। खंड : सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां, कालांवाली, ओढ़ां, नाथूसरी चौपटा।

लोकसभा चुनाव क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र: सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां, कालांवाली, फतेहाबाद, रतिया, नरवाना।

विधानसभा क्षेत्र एवं वर्तमान विधायक सिरसा -श्री मखन लाल सिंगला डबवाली-श्री अजय सिंह चौटाला। ऐलनाबाद-श्री अभय सिंह चौटाला। रानियां- श्री कृष्ण लाल कंबोज। कालांवाली- श्री चरणजीत सिंह।

सि‍रसा जिले का नाम, इसके मुख्‍यायल सिरसा के नाम से उत्‍पन्‍न हुआ है। ऐसा माना जाता है कि सिरसा जिला, उत्‍तर भारत के सबसे पुराने जिलों में से एक है। सिरसा का जिक्र, महाभारत में भी हुआ है, हालांकि उस काल में इसे साईरिषाका के नाम से जाना जाता था। इस स्‍थल का उल्‍लेख, पाणिनी के अष्‍टाधायी और दिव्‍यावदन में भी मिलता है। महाभारत में, यह भी उल्‍लेख किया गया है कि साईरिषाका को पश्चिमी तिमाही के विजय अभियान में नकुल द्वारा लिया गया था। पाणिनी ने उल्‍लेख किया है कि सिरसा 5 वीं सदी का एक समृद्ध शहर था। इतिहास

सिरसा, भारत के हरियाणा राज्‍य में स्थित ए‍क शहर है, जो राष्‍ट्रीय राजमार्ग 10 पर स्थित है। 1819 में, इस क्षेत्र को ब्रिटिश शासन ने अपने अधीन कर लिया था और बाद में इसे दिल्‍ली क्षेत्र के उत्‍तरी - पश्चिमी जिले का एक हिस्‍सा बना दिया था। एक साल बाद, उत्‍तर - पश्चिमी जिले को दो हिस्‍सों में बांट दिया गया जिन्‍हे उत्‍तरी और पश्चिमी जिलों के नाम से जाना गया और सिरसा, पश्चिमी जिले का हिस्‍सा बन गया जिसे बाद में हरियाणा नाम दिया गया। सिरसा और उसके आसपास स्थित पर्यटक स्‍थल

सिरसा जिले में पर्यटकों की सैर के काफी स्‍थल है। सिरसा, डेरा सच्‍चा सौदा का मुख्‍यालय है, यह एक प्रकार का धार्मिक समूह है जिसकी स्‍थापना शाह मस्‍ताना ने की थी, जिनका वास्‍तविक नाम खेमामल था। यह सेक्‍टर, अपनी सामाजिक सेवा गतिविधियों के कारण जाना जाता है और यहां सभी को मुफ्त में लंगर भी छकाया जाता है, साथ ही जनता से किसी भी प्रकार का दान भी नहीं स्‍वीकार किया जाता है। यहां का अन्‍य लोकप्रिय धार्मिक संप्रदाय, राधा स्‍वामी संप्रदाय है जो यहीं स्थित है। सिरसा शहर से 5 किमी. दूर पूवर् की ओर राधा स्‍वामी सत्‍संग घर स्थित है। सेक्‍ट, पंजाब में स्थित अमृतसर के ब्‍यास में स्थित राधा स्‍वामी मुख्‍यालय की एक शाखा है।

पर्यटक जब भी सिरसा जाएं तो वहां कगदाना में स्थित राम देव मंदिर में भी अवश्‍य जाएं। जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि यह मंदिर बाबा राम देवजी को समर्पित है जिन्‍हे भारत के कई राज्‍यों, विशेषकर राजस्‍थान में और पाकिस्‍तान के सिंध में देवता के रूप में पूजा जाता है। बाबारामदेव, गरीबों और पिछड़े वर्ग की मदद करने के लिए जाने जाते थे और उनके बारे में व उनकी चमत्‍कारी शक्तियों के बारे में कई कहानियां भी प्रचलित है। इसके अलावा, यहां आकर रामनगरिया में हनुमान मंदिर और चोरमार खेरा में गुरूद्वारा गुरू गोविंद सिंह की यात्रा भी अवश्‍य करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सिक्‍ख गुरू अपनी रात यहीं बिताते है। यहां डेरा बाबा सारसाई नाथ मंदिर है, जिसे 13 वीं सदी में यहां बनवाया गया था, इस मंदिर को सिरसा में हिसार द्वार के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण सारसाई नाथ ने करवाया था, जो एक प्रमुख गुरू या ऋषि थे, जिन्‍होने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर यहां प्रार्थना, ध्‍यान और कई धार्मिक अनुष्‍ठान भी किए। सिरसा और उसके आसपास के क्षेत्रों में घग्‍गर घाटी की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक की अमूल्‍य विरासत यहां एक स्‍वर्ग समान है। यहां आकर पर्यटक, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के उत्‍खनन स्‍थलों की यात्रा भी कर सकते है।