सदस्य:Vasumathi$21/प्रयोगपृष्ठ

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राजा मल देव के शासान मे जम्मु का नक्श

डोगरा राजवंश और राजा मल देव पर अवलोकन[संपादित करें]

डोगरा वंश उत्तरी भारत के एक हिन्दु राजपुत वंश थी जिसका जड़ इक्ष्वाकु वंश से थी। इनकी भाषा को डोगरी भाषा कहलाते थे। जो संस्कृत पंजाबी और पर्शियन भाषा कि मिलावट थी। इस वंश के राजाओं को डोगरा राजपूत के नाम से कहलाते थे। उनके पह्ले राजा का नाम गुलाब सिंह था । वे अंगलो-सीख युध के बाद उनहे कश्मीर का महाराजा बनादिया गया। इस महाराजा के वंशावलि मे कई राजाओं थे राय जम्बु लोचना, राजा सूरज देव, राय भोज देव, राय अवतार देव, राय जस देव, राय संग्रम देव, राय जासाकर, राय ब्रज देव,राय नरसिंग देव, राजा अज्रन देव, राजा जोध देव, राय मल देव, राय हमिर देव आदि थे । डोगरा रजपुत वंश के मशहूर और गतिशील राजा थे राय मल देव ।

राजा मल देव का शासन[संपादित करें]

राजा मल देव १३६१ से १४०० तक डोगरा रजपुत का राज किया । राय मल देव एक सामर्थ्यशील राजा थे जिन्होने २२ प्रदेशों पर विजय प्रप्त कर इकट्टा करके राज्य किया। [1] यह इनकी बडी उप्लब्धि थी। राय मल देव ने डोगरा रजपुत के राजधानी बबापुरा से जम्मु करवा दिया था। प्रशासनिक मजबूरियों के लिये राजा मल देव ने जम्मु को डोगरा वंश के राजधानी बना दी थी। राजा मल देव ने पुरानी मंडी मे कई महलों बनाई थी। यह पुरानी मंडी काफी मशहूर थी और अभी भी शामिल है। १३९८ मे अमिर तिमुर ने हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया। तिमुर एक सैन्य प्रतिभा के रूप से जाना जाते है। वे एक शानदार कार्यकुशल थे। तिमुर ने हरिद्वार से जम्मु तक २२ युध करके अनेक हिन्दुओं को मरवादिया था। राय मल देव सिर्फ एक राजा थे जो तिमुर के बराबर थे । तिमुर ने राजा मल देव पर भी हमला किया था पर उस वक्त राजा मल देव का कोई इरादा नही था तिमुर से लडने का क्यूंकि तिमुर की सेना काफी बडी थी। [2] राजा मल देव काफी बहादुर थे और तिमुर का सामना जोश से किया था। राय मल देव तिमुर के लडाई मे घायल हुए और तिमुर के सामने उन्हे शामिल किया गया था। सामर्त्यशालि राय मल देव अपनी जान बचाने के लिए इस्लाम मे परिवर्तित हुए ।

राजा मल देव के आक्री दिनों[संपादित करें]

१३९८ मे डोगरा और मुगल राज्य के आपसि लडाई मे तिमुर का दिल्ली कब्ज़ा करना और आसान बन गया था। तिमुर के जाने के बाद राजा मल देव ने फिर से हिन्दुत्व को अपनालिया और वे स्वास्थ्य के अनुसार बहुत कमज़ोर हो गये थे । १४०० मे राय मल देव चल बसे और उनके बाद बेटे राजा हमिर देव सिंहासन पर बैठे। राजा हमिर देव डोगरा वंश के आख्री राजा थे । इनके बाद मुगल राज्य प्रारंभ हुआ। सुलतान अली शाह ने राजा मल देव कि बेटी को शादी कर ली थी। [3]

राजा मल देव की मृत्यु के पश्चात जम्मु[संपादित करें]

राजा मल देव की मृत्यु के कहीं वर्शों पश्चात भी उनके प्रशंसा कि गीत भारत मे गाया जाता था । उनके अनेक उत्तराधिकारियों मे से महाराज गुलाब सिंग ने उनकी कुल कि मर्यादा को रोशन किया है। वह नये रियासत जम्मु और कश्मीर के प्रथम महाराज थे। महाराज गुलाब सिंग का जन्म १७ अक्टूबर १७९२ को हुआ था। उनके कई उपलब्धियों मे से राजौरी का अगर खान से पराजित तथा किशत्वार का राजा तेघ मुहमद सिंग से पराजित विशिष्टता प्राप्त करते है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.archive.india.gov.in/knowindia/state_uts.php?id=11
  2. http://www.dailyexcelsior.com/medieval-jammu/
  3. https://books.google.co.in/books?id=thSltS4Xg4MC&pg=PA212&lpg=PA212&dq=sultan+ali+shah+married+mal+dev's+daughter&source=bl&ots=YqCgXjOXFP&sig=kwRgGctGafVFxld9i969P8UzJPg&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjn9vX67PjRAhWFX5QKHWQ2B_0Q6AEIEzAA#v=onepage&q=mal%20dev&f=false