सदस्य:Samskrathi/प्रयोगपृष्ठ/1

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

बारकूर[संपादित करें]

बारकूर सीता नदी के तट पर स्थित ग्राम समूह है। यह जगह अपने इतिहास और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

स्थान[संपादित करें]

बारकूर कर्नाटक रज्य के उडुपी जिला में स्थित है।यह तीन ग्रामों का समूह हैं-होसला,हनेहल्ली और कच्चूर।बारकूर सीता नदी के तट पर स्थित है। यह उडुपी से १६ किलोमीटर दूर हैं।बारकूर को "मंदिरों की भूमि" भी कहा जाता हैं क्योंकि यहाँ मंदिरों का सागर हैं। इस जगह में सीता नदी बहकर अरब सागार से एक हो जाती हैं।

इतिहास[संपादित करें]

बारकूर का पुराना नाम बरकनूर था। यह तुलुवा रज्य और अलूपा राज्य की राजधानी हुआ करती थी। यह होयसला रज्य की उप-राजधानी भी थी। यह बहुत समय के लिए विजयनगर, केलदी और होयसला राज्यों के नियंत्रण में थी। १४वी शताब्दी में यह विजयनगर रज्य का एक प्रांत हुआ करती थी।जब राजा हरिहर शासन कर रहे थे, इस प्रांत का नायक पांड़ारिदेव था। बारकूर के केंद्र से संयोजित १० जगह थी जिन्हें "केरी" बुलाया जाता था। हर एक केरी में एक तालाब और अनेक मंदिर थी। परंपरा के अनुसार यहाँ के राजा सारे मंदिरों में जाते और अंत में महल के पासवाले केरी-"कोटेकेरी" के मंदिर,पंचलिंगेश्वर मंदिर में जाते थे। इस दिन को रथोत्सव माना जाता। कथानुसार यहाँ ३६५ मंदिर हुआ करती थी!साथ ही साथ, एक समय में बारकूर एक समृद्ध बंदरगाह भी हुआ करती थी। यह एतिहासिक रूप से एक प्रमुख स्थान है। यहाँ से १०० से अधिक ताम्र और पत्थर के शिलालेख पाए गए हैं!

मंदिर वास्तु-कला[संपादित करें]

यहाँ के अधिकतर मंदिर नौ और बारहवी शताब्दी के समयकाल के बीच में बनाए गये थे।बारकूर में प्रवेश करते ही हमे उनके शिल्पकला का प्रतीक मिलता हैं- चट्टानों का एक मंटप मौजूद हैं, जिसे "कल्लु चप्परा" भी कहा जाता है। इस मंटप के बीच में नंदी की एक मूर्ती मौजूद हैं।बारकूर के अनेक प्राचीन मंदिरों की विषेशता यह हैं कि इनके ढलान वाली छत टेराकोटा के टाइलों से बनी हुई हैं। सभी मंदिर गोपुरों के बगैर हैं, यह द्रविड़ वास्तुकला का एक विषेश लक्षण है। यहाँ पाए गए शिलालेख इतिहास में प्रमुख प्रमाण प्रतीत होते हैं।पंचलिंगेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव को अर्पित है, बारकूर का सबसे बड़ा और सबसे पुराना मंदिर हैं। मंदिरों में एक सुंदर और विशाल गर्भगुड़ि मौजूद है जिसके सामने सुंदर और विशाल प्रांगण है और चारों ओर चट्टानों के अलंकृत खंभ हैं। अधिकतर मंदिरों में मूर्ति तब नष्ट कर दी गइ थी जब आक्रमणकारियों ने हमला किया था।सभी मूर्तियों के कटे हुआ शीर्ष कल्लु चप्परा में एक साथ रख दी गए हैं और इन सभी मूर्तियों की पूजा अकसर किया जाता हैं। गर्भ-गुड़ी में कुछ भी न रखा जाए, यह यहाँ के जनता को अच्छा न लगा और इसलिए गर्भ-गुड़ी में अभी मूर्तियों की जगह पत्थर शिलालेख रख दी गए हैं जिनमें अनेक देवों का चित्र बना हुआ हैं।

हिन्दू मंदिरों के अलावा यहाँ अनेक जैन बसदियाँ भी पाए जाते हैं। यहाँ दो दुर्गों के भग्नावषेश भी पाये जाते हैं। यहाँ के जैन बसदियाँ में सबसे प्रमुख है "कत्तले बसदी"(अर्थात अन्धेरा बसदी) जो दूसरे बसदियों के बीच में ही स्थित हैं। यहाँ के वास्तु-कला में एक खास बात यह हैं कि किसी भी मंदिर में गोपुरम नहीं हैं।बारकूर के विजयनगरी किले के बारे में अनेक रोचक कहानियाँ रची गई हैं और यहाँ के लोग अपने-अपने छोटे किस्से जोड़ते रहते हैं। एसी कहानियों में अत्यंत रोचक है यह की विजयनगरी किले के नीचे स्थित एक गुप्त मार्ग में सोना और चाँदी का भंडार हैं। यह भी कहा गया है की इस खजाने की रखवाली के लिए अनेक सर्प मौजूद है जो खजाने को खोदने नहीं देते हैं! किले में अश्वों और हाथियों को बाँधने के लिए अनेक विषेश खंभ पाए जाते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि यहाँ बहुत सैनिक हुआ करते थे जो सेना में नियुक्त थे।

पर्यटन[संपादित करें]

यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल हैं- पंचलिंगेश्वर, महालिंगेश्वर, बट्टे विनायक,गोपालकृष्ण, सोमेश्वर,कच्चूर नागेश्वर,हत्तर नारायण,भैरवगणपति मंदिर। मोगवीर के कुला स्त्री महा अम्मा देवालय हृदय के आकार का मंदिर हैं। बेण्णेकुद्रू का द्वीप बहुत सुंदर है और यहा पर कुलमहास्री मंदिर बहुत भक्तों को आकर्शित करता है। पुराना किला और महल स्थान को सिम्हासन-गुड़्ड़े(अर्थात सिम्हासन पहाड़) बुलाया जाता है जहाँ शताब्दियों पुरानी महल के भग्नावषेश मौजूद है। इसके अलावा कल्लु चप्परा, विजयनगर का किला और कत्तले बसदी को देखे बिना यहाँ से कोई नहीं लौटता!

विजयनगर का किला
कल्लू चप्परा

संस्कृति[संपादित करें]

यहाँ के लोग कन्नड,उर्दू, तुलु, कोंकनी और ब्यारी( एक तरह का ग्रामीन कन्नड) भाषाओं में वार्तालाप करते हैं।बारकूर ज्यादा जाना-माना पर्यटन स्थल तो नहीं है, किंतु यह बहुत ही सुंदर और शांत जगह हैं। यहाँ हिन्दु, मुसलमान और मंगलूरू कैथलिक जन मिल-जुलकर रह्तें हैं।

यह जगह मोगवीर नामक समूह के जनों के लिए एक पावन स्थल माना जाता हैं और विश्व-भर के मोगवीर यहाँ के कुला स्त्री महा अम्मा देवालय की देवी के दर्शन प्राप्त करने अधिकतर संख्या में मौजूद होते हैं।

पहुँच[संपादित करें]

कोन्कन रेल्वे के मुंबई-मंगलूरू ट्रेन यहाँ ठहरता हैं और यहाँ बहुत लोग आते-उतरते हैं।

निष्कर्ष[संपादित करें]

बारकूर एतिहासिक और धार्मिक रूप से बहुत महत्त्व्पूर्ण स्थान है।हमारे प्रतीक्षा में न जाने कितने सदियाँ चुप बैठी थी यह मंजुल स्थान। बारकूर एक शांत जगह है जो अपने ही अंदर ना जाने क्या ऐतिहासिक गुफ्तगू छिपाकर बैठी है!

ग्रंथ सूची[संपादित करें]

१ </ref>http://www.trayaan.com/2013/01/ruins-of-barkur.html#.WocG_ohEmyI</ref> २ </ref>http://www.karnatakaholidays.com/barkur.php</ref> ३ </ref>https://en.wikipedia.org/wiki/Barkur</ref>