संख्यात्मक विश्लेषण

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एक चित्र जिस्मे एक शिक्षिका संख्यात्मक विश्लेषण सिखा रही हैं।

गणितीय समस्याओं का कम्प्यूटर की सहायता से हल निकालने से सम्बन्धित सैद्धान्तिक एवं संगणनात्मक अध्ययन संख्यात्मक विश्लेषण या आंकिक विश्लेषण (अंग्रेज़ी: Numerical analysis) कहलाता है।

सैद्धान्तिक तथा संगणनात्मक पक्षों पर जोर वस्तुतः कलन विधियों (अल्गोरिद्म) की समीक्षा की ओर ले जाती है। इस बात की जाँच-परख की जाती है कि विचाराधीन कलन विधि द्वारा दी गयी गणितीय समस्या का हल निकालने में -

  • कितना समय लगेगा;
  • कितनी स्मृति (मेमोरी) की आवश्यकता होगी;
  • हल में कितनी अशुद्धि (error) आयेगी;
  • अल्गोरिद्म किस स्थिति मे कन्वर्ज (converge) करेगा एवं कन्वर्जेन्स की गति क्या होगी;

उपयोग एवं लाभ[संपादित करें]

  • कुछ ही गणितीय समस्याओं का हल विश्लेषणात्मक विधि से प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु सभी समस्याओं को आंकिक विधि द्वारा हल किया जा सकता है।
  • संगणकों की सर्वसुलभता एवं उनकी तेज गति के कारण आंकिक विधियों का अधिकाधिक प्रयोग व्यावहारिक रूप से सम्भव हुआ है।
  • आंकिक विधि से प्राप्त हल में कुछ न कुछ अशुद्धि रहती है, किन्तु व्यावहारिक जगत कीं किसी समस्या के पूर्णतः शुद्ध (exact) हल की आवश्यकता ही नहीं होती। क्योंकि गणितीय समस्याएं ही स्वयं पूर्ण्तः शुद्ध रूप से परिभाषित न होकर एक approximate रूप में ही पारिभाषित होती हैं।

आंकिक विश्लेषण के प्रमुख क्षेत्र[संपादित करें]

कुछ प्रमुख समस्याएं, जो आंकिक विधि से हल की जाती हैं, नीचे दी गयी हैं:

  • फलनों का मान निकालना
  • इन्टरपोलेशन, इक्स्ट्रापोलेशन एवं रिग्रेशन करना
  • एक समीकरण अथवा युगपत समीकरणों को हल करना
  • आइगेन वैल्यू या सिंगुलर वैल्यू समस्याओं का हल
  • इष्टतमीकरण (optimization)
  • अवकलज समीकरण का हल (solution of differential equations)
  • समाकलन का परिकलन (evaluation of integrals)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]