शेर सिंह राणा

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समशेर सिंह राणा
जन्म पंकज सिंह[1]
17 मई 1976 (1976-05-17) (आयु 46)
रुड़की, उत्तराखंड),
जीवनसाथी प्रतिमा सिंह

पंकज सिंह उर्फ समशेर सिंह राणा एक राजनीतिज्ञ है, इन्होंने 2001 मैं सम्बन्धित एक भारतीय डकैत से सांसद बनी फूलन देवी की हत्या की । अगस्त 2014 में, राणा को आजीवन कारावास और देवी की हत्या के लिए ₹100,000 (लगभग US$1,600) का जुर्माना, साथ ही साथ साजिश के आरोप, 10 साल की सजा सुनाई गई थी।[2] राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान के अवशेषों को वापस भारत ले आए। अब राणाजी एक राजनेता के रूप में काम करते हैं और उनकी अपनी पार्टी है.[3] [4]

फूलन देवी की हत्या[संपादित करें]

25 जुलाई 2001 को दिल्ली स्थित सरकारी आवास के सामने फूलन देवी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई।[5] इस घटना के दो दिन बाद आरोपी शेर सिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली। इस हत्या को अंजाम देने का जो कारण सामने आया वह चौंकाने वाला था। पुलिस के अनुसार राणा ने बहमई हत्याकाण्ड में मारे गए 22 राजपूतों की हत्या का बदला लेेेेने के लिए हत्या की। [6][7]

जेल से फरार[संपादित करें]

लगभग तीन साल पश्चात 17 फरवरी 2004 को राणा फिल्मी अंदाज में तिहाड़ जेल से फरार हो गये। तिहाड़ जैसी अतिसुरक्षित जेल से किसी कैदी का फरार हो जाना अपने आप में बहुत बड़ी बात थी ओर योजना के अनुसार राणा तालिबान चले गए और महाराज पृथ्वीराज चौहान की अस्थियाँ लेकर आये। जिस कारण राणा एक बार फिर सुर्खियों में आ गये। लेकिन 17 मई 2006 को राणा को एक बार फिर कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तार कर लिया गया।[8] अगस्त 2014 में दिल्ली की एक निचली अदालत ने फूलन देवी हत्याकाण्ड के दोषी शेर सिंह राणा को उम्रकैद तथा 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।[9]

तिहाड़ जेल से फरार[संपादित करें]

राणा 17 फरवरी 2004 को दोस्त संदीप की मदद से तिहाड़ जेल से फरार हो गया,संदीप ने पुलिस के वेश में राणा को हरिद्वार के दरबार में ले जाने का नाटक किया.[10] और बाद में राणाजी मुरादाबाद गय और एक होटल में चेक-इन किया। राणाजी ने फिर उनके रिश्तेदारों से संपर्क किया जिन्होंने उन्हें संदीप के माध्यम से 1 लाख रुपये भेज दिये.फिर राणाजी वहाँ से रांची चले गए और उन्होंने अपने मित्र संजय गुप्ता के नाम से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया.[11]

पासपोर्ट के लिए दो महीने के इंतजार के दौरान, राणाजी गया और वाराणसी गए, जहां उन्होंने अपने फाइनेंसर सुभाष ठाकुर से मुलाकात की, जो तब स्थानीय जेल में बंद थे। राणा इसके बाद कोलकाता गए, जहां उन्होंने तीन महीने का बांग्लादेश वीजा प्राप्त किया।[12] राणा ने संजय के रूप में प्रस्तुत होकार खुलना में किराए के लिए एक घर लिया और वहीं रहने लगे, बांग्लादेश भाग फरार होन के बाद, रणजी ₹16,500 में एक सैटेलाइट फोन खरीदा ताकि वह बिना ट्रैक किए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से संपर्क कर सके।[13] और फिर दुबई से अफगानिस्तान की यात्रा की,[11] - उन्हें व्यक्तिगत खर्च के रूप में लगभग ₹15,000 से ₹20,000 प्रति माह मिलते रहे.[14] उनकी बहादुरी और बुद्धिमत्ता की हिंदू क्षत्रिय (राजपूत) सेना ने प्रशंसा की।[15]

राणाजी अफगानिस्तान चले गए और 11वीं शताब्दी के हिंदू राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान के अवशेष लाए,उन्होंने इसका 40 मिनट का वीडियो बनाया और इसे यूट्यूब पर अपलोड कर दिया था , जो इस दावे की पुष्टि करता है.राणाजी को उनकी बहादुरी और बुद्धिमत्ता के कारण सरकार ने उसे न्याय दो और उनकी सजा माफ कर दी [16]

2012 विधानसभा चुनाव[संपादित करें]

शेर सिंह राणा ने 2012 में उत्तर प्रदेश के जेवर से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Bandit Queen murder suspect escapes from jail". Gaurdians.com. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  2. "Killer of Phoolan Devi, India's 'Bandit Queen', given life sentence". The Guardian. 14 August 2014. मूल से 23 October 2020 को पुरालेखित.
  3. "Phoolan Devi's killer arrested in Kolkata". The Times Of India. 25 April 2006. मूल से 1 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 December 2013.
  4. "Killer of Phoolan Devi, India's 'Bandit Queen', given life sentence". The Guardian. 14 August 2014. मूल से 1 November 2020 को पुरालेखित.
  5. "फूलन देवी हत्याकांड: शेर सिंह राणा दोषी करार, 12 अगस्‍त को होगा सजा का एलान". भास्कर न्यूज़. 4 अगस्त 2014. मूल से 14 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 अगस्त 2014.
  6. "Man arrested for murder of 'Bandit Queen'". The Telegraph. London. 27 जुलाई 2001. मूल से 11 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2012.
  7. "Profile of Sher Singh Rana". Times of India. 27 जुलाई 2001. मूल से 8 जून 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2012.
  8. "Rain gods sealed Sher Singh Rana's fate". The Hindu. Chennai, India. 26 अप्रैल 2006. मूल से 16 फ़रवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 अगस्त 2014.
  9. "फूलनदेवी हत्याकांड में शेर सिंह राणा को उम्रकैद की सजा". The Times Of India. 14 अगस्त 2014. मूल से 14 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 अगस्त 2014.
  10. Aug 9, Raj Shekhar / TNN / Updated; 2014; Ist, 05:47. "How Phoolan's killer Rana just walked out of jail with fake cop | Delhi News - Times of India". The Times of India (अंग्रेज़ी में). मूल से 11 November 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  11. Daniyal, Abhishek Dey & Shoaib. "Dalit man's death in UP puts spotlight on Phoolan Devi's killer and his rise as a Thakur icon". Scroll.in (अंग्रेज़ी में). मूल से 11 May 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  12. "Tihar goes hi-tech to prevent Sher Singh Rana style escape". www.outlookindia.com. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  13. "Tihar jailbreak: Fake cop held". www.rediff.com. मूल से 1 July 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  14. "Tihar break case: Two get lighter term". Hindustan Times (अंग्रेज़ी में). 9 December 2007. अभिगमन तिथि 3 December 2020.
  15. Pandey, Sidharth (8 August 2014). "Phoolan Devi Murder Case: Main Accused Sher Singh Rana Found Guilty". NDTV. अभिगमन तिथि 10 December 2018.
  16. "Indiana Jones of Etawah". Hindustan Times (अंग्रेज़ी में). 26 April 2006. अभिगमन तिथि 3 December 2020. SHER SINGH Rana, the prime accused in the Phoolan Devi murder case, seems to have got into the habit of crying out Rajput honour every time he lands in jail. And his claims are getting outlandish by the day.