विश्व मौसम विज्ञान दिवस

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हर वर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस[1] बनाया जाता है।30 मार्च सन 1950[2] को विश्व मौसम संगठन संयुक्त राष्ट्र के एक विभाग के रूप में स्थापित हुआ तथा जेनेवा में इसका मुख्यालय रखा गया। भूविज्ञान पर आधारित मौसम विभाग में कई विषयों पर शोध होता है इस विज्ञान का उपयोग समय समय पर आने वाली बाढ़ सूखा भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा ही नहीं वरन वर्षा की स्थिति चक्रवातों की संभावनाएं एवं हवाई यातायात, समुद्री यातायात आदि को मौसम की सटीक जानकारी प्रदान कर सहायता करना है आजकल मौसम विज्ञान अति उन्नत स्तर पर पहुंच गया है मौसम गुब्बारों आधुनिक रडारों तथा उच्च तकनीक से युक्त कृत्रिम उपग्रहों एवं कंप्यूटरों के माध्यम से विभिन्न सभी करों के उपयोग से हम मौसम की सटीक जानकारी पानी के और अग्रसर हुए हैं कृत्रिम उपग्रहों द्वारा भेजे जाने वाली उच्च स्तर के चित्रोंतथा उनके द्वारा फिल्टर की गई जानकारियों से हम फसलों का उन का रकबा फसल का प्रकार इत्यादि हम आसानी से जान सकते हैं यही नहीं मौसम विभाग विभिन्न शहरों के उच्चतम निम्नतम तापमान आर्द्रता वहां का प्रदूषण का स्तर भी भलीभांति पूर्वक बता सकता है।

चक्रवात
चक्रवात का सिमुलेशन

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 18 अगस्त 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2017.
  2. "विश्व मौसम संगठन की स्थापना". मूल से 16 मई 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 अप्रैल 2017.