रणधीर प्रसाद वर्मा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

रणधीर प्रसाद वर्मा भारतीय पुलिस अफसर थे जिनका धनबाद में एक बैंक डकैती को रोकते समय निधन हो गया था। उन्हें वीरता के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उनके सम्मान में सन् २००४ में स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था।[1]

उनका जन्म बिहार के सुपौल जिले (पूर्व सहरसा जिला) के जगतपुर नामक गाँव में हुआ। उनकी शिक्षा सेंट जॉन हाई स्कूल तथा पटना कॉलेज में हुई। वो १९७४ में भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े। पुलिस अफसर के रूप में उन्होंने विभिन्न आपराधिक गिरोहों का सफाया किया।

धनबाद में वो पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे उसी समय ३ जनवरी १९९१ को बैंक ऑफ़ इंडिया की शाखा में डकैती को विफल करने के प्रयास में उनका निधन हो गया।[2][3]

उनकी विधवा पत्नी रीता वर्मा बाद में राजनीति से जुड़ गयी[4] और भाजपा उम्मीदवार के रूप में लोक सभा सांसद निर्वाचित हुई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "COMMEMORATIVE POSTAGE STAMPS IN HONOUR OF ASHOK CHAKRA WINNERS NEERJA BHANOT AND RANDHIR PRASAD VERMA" (अंग्रेज़ी में). ८ अक्टूबर २००४. मूल से ३० अक्टूबर २००४ को पुरालेखित.
  2. "1991 robbery: Dhanbad SP remembered for his courage" [१९९१ डकैती: धनबाद एसपी को उनके पराक्रम के लिए याद किया गया] (अंग्रेज़ी में). द टाइम्स ऑफ़ इंडिया. ४ जनवरी २०१३. अभिगमन तिथि ११ जून २०१५.
  3. "अकेले ही कूद गये थे जंग के मैदान में, अपनी जान गवा कर बचाई कई जिंदगी". दैनिक भास्कर. ५ जनवरी २०१४. अभिगमन तिथि ११ जून २०१५.
  4. "सुरमयी स्वरलहरियों ने शहीद रणधीर को दी श्रद्धांजलि". दैनिक जागरण. ३ जनवरी २०१५. अभिगमन तिथि ११ जून २०१५.