मोहम्मद असरारुल हक

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Mohommad Asrarul Haque

पूर्वा धिकारी Tasleem Uddin
उत्तरा धिकारी Mohammad Jawed
चुनाव-क्षेत्र Kishanganj

जन्म 15 फ़रवरी 1942
Vill. Tarabari, Kishanganj
मृत्यु 7 दिसम्बर 2018(2018-12-07) (उम्र 76)
राजनीतिक दल Indian National Congress
जीवन संगी Late Smt. Salma Khatoon
बच्चे 5
निवास Vill. Tarabari, Kishanganj
शैक्षिक सम्बद्धता Darul Uloom Deoband (M.A)
As of 12 December, 2016
Source: [1]

मोहम्मद असरारुल हक (15 फरवरी 1942 – 7 दिसंबर 2018), जिन्हें मौलाना असरारुल हक़ कासमी के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वह भारतीय संसद के सदस्य थे, और किशनगंज सीट से चुने गए थे। वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष भी थे।

व्यक्तिगत जीवन[संपादित करें]

उनकी शादी सलमा खातून के साथ 16 मई 1965 को हुई थी।उनके पत्नी कि 9 जुलाई 2012 को म्रत्यु हुई। उनके अपने तीन बेटे और दो बेटियाँ थीं। [1]

राजनीतिक कैरियर[संपादित करें]

हक ने 2009 में भारतीय आम चुनाव में किशनगंज सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी हुए। [2] 2014 के आम चुनाव में, उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के दिलीप कुमार जायसवाल को मात दिया[3] और अपने सीट को बरकरार रखा। [4]

हक के संसद सदस्य के कार्यकाल में 224-एकड़ (91 हे॰) में किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के केंद्र की स्थापना हुई! मई 2014 तक, केवल बैचलर ऑफ एजुकेशन कोर्स की पढ़ाई शुरू हुई थी। टू सर्कल्स ने कि सरकारी कॉलेजों के निराशाजनक स्तिथि के लिए । [4]

हक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष भी थे। [5]

मौलाना ने मिल्ली गर्ल्स स्कूल के साथ-साथ, पुरे बिहारमें 163 प्राथमिक स्कूल भी खोले। उन्होंने बिहार में सुनामी और बाढ़ के पीड़ितों के बीच राहत सामग्री भी वितरित की। वे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य, ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया तालीमी वा मिल्ली फाउंडेशन के अध्यक्ष थे। वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष भी थे।

राय[संपादित करें]

दक्षिणपंथी राजनीति[संपादित करें]

हक के अनुसार सभी भारतीय सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे अगर सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की कोशिश भी की। [6]

इस तथ्य का हवाला देते हुए कि 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 31% वोट हासिल किए (जिसका मतलब है कि 69% लोगों ने अन्य पार्टियों को वोट दिया), हक ने दावा किया कि पार्टी को संविधान में संशोधित करने का कोई अधिकार नहीं है। [6] बीजेपी के बारे में हक ने लिखा कि भले ही पार्टी ने सत्ता में आने के बाद अधिक रोजगार पैदा करने का वादा किया था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रही। उन्होंने कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने के प्रयास के लिए केंद्र सरकार की भी आलोचना की। [7]

इस्लामिक आतंकवाद[संपादित करें]

हक ने कहा कि 21वीं सदी में, एक "अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनी षड्यंत्र" है जो यह दावा करता है कि इस्लाम आतंकवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने बोको हरम की भी आलोचना की और कहा कि संगठन इस साजिश का हिस्सा है। [8]

म्रत्यु[संपादित करें]

हक ने 6 दिसंबर, 2018 को दारुल उलूम सुफा में छात्रों और शिक्षकों की एक सभा को धार्मिक संबोधन दिया। उन्हें 7 दिसंबर, 2018 को लगभग 3:30 बजे मृत घोषित कर दिया गया। मौत का कारण दिल का दौरा था। [9]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Maulana Asrarul Haque Qasmi's wife passes away". Milli Gazette. अभिगमन तिथि 17 June 2017.
  2. "Kishanganj Lok Sabha Elections and Results 2014". Elections. अभिगमन तिथि 16 June 2017.
  3. "Bihar betters 2009 poll tally, records over 59% turnout". अभिगमन तिथि 16 June 2017.
  4. "Challenges for Kishanganj MP Maulana Qasmi". Two Circles. अभिगमन तिथि 16 June 2017.
  5. "Maulana Asrarul Haque talks about his work as MP of Kishanganj". Two Circles. अभिगमन तिथि 17 June 2017.
  6. "Don't tamper with the Constitution: Maulana Asrar-ul-haq to Narendra Modi government on Article 370". DNA India. अभिगमन तिथि 16 June 2017.
  7. "The Urdu Press: Three Years". The Indian Express. अभिगमन तिथि 17 June 2017.
  8. "Boko Haram causing infamy to Islam and Muslims:Maulana Asrarul Haque". Milli Gazette. अभिगमन तिथि 17 June 2017.
  9. "Kishanganj Congress MP Maulana Asrar-ul-Haque Qasmi passes away at 76". Indian Express.
लोकसभा
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संसद के सदस्य


किशनगंज के लिए



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रिक्त