मूलाधार चक्र

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

मूलाधार चक्र तंत्र और योग साधना की चक्र संकल्पना का पहला चक्र है। यह अनुत्रिक के आधार में स्थित है। इसे पशु और मानव चेतना के बीच सीमा निर्धारित करने वाला माना जाता है। इसका संबंध अचेतन मन से है, जिसमें पिछले जीवनों के कर्म और अनुभव संचित रहते हैं। कर्म सिद्धान्त के अनुसार यह चक्र प्राणी के भावी प्रारब्ध निर्धारित करता है।

विशेषता[संपादित करें]

  • इसके सकारात्मक गुण हैं - स्फूर्ति, उत्साह और विकास।
  • इसके नकारात्मक गुण हैं- सुस्ती, निष्क्रियता, आत्म-केंद्रन और विषयासक्ति।

प्रतीक[संपादित करें]

  • इस चक्र के देवता पशुपति महादेव के रूप में ध्यानावस्थित भगवान शिव हैं। यह निम्नस्तरीय गुणों पर नियंत्रण करने का प्रतीक है।
  • इस चक्र का सांकेतिक प्रतीक चार पंखुड़िय़ों वाला कमल है। चारों पंखुड़ियाँ इस चक्र में उत्पन्न होने वाले मन के चार तत्वों: मानस, बुद्धि, चित्त और अहंकार के प्रतीक हैं।
  • इस चक्र का दूसरा प्रतीक चिह्न उल्टा त्रिकोण है। यह ब्रह्माण्ड की ऊर्जा खिंचते चले आने का द्योतक है। यह चेतना के ऊर्ध्व प्रसार का भी बोध कराता है।
  • इस चक्र का प्रतिनिधि पशु ७ सूंडों वाला हाथी है। हाथी बुद्धि का प्रतीक है। ७ सूंडें पृथ्वी के ७ खजानों (सप्तधातु) की प्रतीक हैं।

इस चक्र का अनुरूप तत्त्व पृथ्वी है।

  • इस चक्र का रंग लाल है जिसे शक्ति का रंग माना जाता है। [1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  1. मूलाधार चक्र
  2. स्वाधिष्ठान चक्र
  3. मणिपुर चक्र
  4. अनाहत चक्र
  5. विशुद्धि चक्र
  6. आज्ञा चक्र
  7. बिंदु चक्र
  8. सहस्रार चक्र

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]