भूगतिकी

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पृथ्वी पर महासागरीय भौगोलिक तख़्ते निम्नस्खलित होने से महासागरीय गर्त (खाईयाँ या ट्रेन्च) बन जाते हैं
बृहस्पति ग्रह के उपग्रह आयो का एक भूगतिक चित्रण

भूगतिकी (Geodynamics) भूभौतिकी की वह शाखा है जो पृथ्वी पर केन्द्रित गति विज्ञान का अध्ययन करती है। इसमें भौतिकी, रसायनिकी और गणित के सिद्धांतों से पृथ्वी की कई प्रक्रियाओं को समझा जाता है। इनमें भूप्रावार (मैंटल) में संवहन (कन्वेक्शन) द्वारा प्लेट विवर्तनिकी का चलन शामिल है। सागर नितल प्रसरण, पर्वत निर्माण, ज्वालामुखी, भूकम्प, भ्रंशण जैसी भूवैज्ञानिक परिघटनाएँ भी इसमें सम्मिलित हैं। भूगतिकी में चुम्बकीय क्षेत्रों, गुरुत्वाकर्षण और भूकम्पी तरंगों का मापन तथा खनिज विज्ञान की तकनीकों के प्रयोग से पत्थरों और उनमें उपस्थित समस्थानिकों (आइसोटोपों) का मापन भूगतिकी में ज्ञानवर्धन की महत्वपूर्ण विधियाँ हैं। पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर अनुसंधान में भी भूगतिकी का प्रयोग होता है।[1][2][3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Ismail-Zadeh, Alik; Tackley, Paul J. (2010). Computational methods for geodynamics. Cambridge University Press. ISBN 9780521867672.
  2. Jolivet, Laurent; Nataf, Henri-Claude; Aubouin, Jean (1998). Geodynamics. Taylor & Francis. ISBN 9789058092205.
  3. Turcotte, D.; Schubert, G. (2002). Geodynamics (2nd ed.). New York: Cambridge University Press. ISBN 0-521-66186-2.