सागर नितल प्रसरण

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समुद्री भूपर्पटी की आयु; सबसे नयी लाल रंग में समुद्री कटकों से सहारे जहाँ सागर नितल प्रसरण हो रहा है और जो अपसारी प्लेट सीमायें हैं

सागर नितल प्रसरण (अंग्रेज़ी:Seafloor spreading) एक भूवैज्ञानिक संकल्पना है जिसमें यह अभिकल्पित किया गया है कि स्थलमण्डल समुद्री कटकों के सहारे प्लेटों में टूट कर इस कटकीय अक्ष के सहारे सरकता है और इसके टुकड़े एक दूसरे से दूर हटते हैं तथा यहाँ नीचे से मैग्मा ऊपर आकार नए स्थलमण्डल (प्लेट) का निर्माण करता है।[1]

 भौतिक भूगोल सविंदर सिंह  यह सिद्धांत 1960 में प्रतिपादित किया हैरी हैस महोदय के द्वारा  सागर मित्र प्रश्न सिद्धांत के प्रतिपादक से पूर्व हेरियस में निम्नलिखित तथ्यों का विश्लेषण किया 

मध्य महासागरीय कटक के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार सामान्य किया है जिससे अत्यधिक मात्रा में लावा बाहर निकलता है और भूपर्पटी का निर्माण होता है

महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनों तरफ समान दूरी पर पाई जाने वाली चट्टानों के निर्माण का समय संरचना संगठन एवं चुंबकीय गुणों में समानता पाई जाती है

कटकों के समीप चट्टानी नवीनतम और कटकों के दूर जाने पर क्रमश अधिक प्राचीन चट्टाने पाई जाती है


महासागरीय पेटी की चट्टाने महाद्वीपीय प्रॉपर्टी की चट्टानों की अपेक्षा अधिक नवीन है

गहरी खाई में भूकंप के उद्गम अधिक गहराई पर जबकि मध्य महासागरीय कटक के क्षेत्र में भूकंप कम गहराई पर उत्पन्न होते हैं


=सन्दर्भ==
  1. Kent C. Condie - Seafloor spreading, Plate Tectonics & Crustal Evolution