भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड

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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
मुंबई स्थित सेबी भवन
मुंबई स्थित सेबी भवन
संस्था अवलोकन
स्थापना 12 अप्रैल 1992[1]
अधिकार क्षेत्र भारत सरकार
मुख्यालय मुम्बई, महाराष्ट्र
कर्मचारी 525 (2009)[2]
संस्था कार्यपालक उपेन्द्र कुमार सिन्हा, अध्यक्ष
वेबसाइट
sebi.gov.in

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है। इसकी स्थापना सेबी अधिनियम 1992 के तहत 12 अप्रैल 1992 में हुई[1] सेबी का मुख्यालय मुंबई में बांद्रा कुर्ला परिसर के व्यावसायिक जिले में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी व पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

इतिहास[संपादित करें]

इसकी स्थापना आधिकारिक तौर पर वर्ष 1988 में भारत सरकार द्वारा की गई और भारतीय संसद द्वारा पारित सेबी अधिनियम, 1992 के साथ 1992 में इसे संवैधानिक अधिकार दिया गया था। सेबी के अस्तित्व में आने से पहले पूंजी निर्गम नियंत्रक नियामक प्राधिकरण था, जिसे पूंजी मुद्दे (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 के अंतर्गत अधिकार प्राप्त थे।

कार्य[संपादित करें]

सेबी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय स्टाक निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना और प्रतिभूति बाजार के विकास तथा नियमन को प्रवर्तित करना है। सेबी को एक गैर वैधानिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया जिसे SEBI ACT1992 के अन्तर्गत वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। 25 जनवरी 1995 को सरकार द्वारा पारित एक अध्यादेश के द्वारा पूंजी के निर्गमन, प्रतिभूतियों के हस्तांतरण तथा अन्य संबंधित मामले के सम्बन्ध में सेबी को नियंत्रक शक्ति प्रदान कर दिया गया है। वर्तमान कानूनों तथा नियंत्रणों में परिवर्तन के सम्बन्ध में सेबी अब एक स्वायत्त संस्था है और अब उसे सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं। इसके निर्धारित कार्य निम्नलिखित हैं-

  • 1. प्रतिभूति बाजार (सेक्योरिटीज मार्केट) में निवेशको के हितों का संरक्षण तथा प्रतिभूति बाजार को उचित उपायों के माध्यम से विनियमित एवं विकसित करना।
  • 2. स्टॉक एक्सचेंजो तथा किसी भी अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना।
  • 3. स्टॉक ब्रोकर्स, सब-ब्रोकर्स, शेयर ट्रान्सफर एजेंट्स, ट्रस्टीज, मर्चेंट बैंकर्स, अंडर-रायटर्स, पोर्टफोलियो मैनेजर आदि के कार्यो का नियमन करना एवं उन्हें पंजीकृत करना।
  • 4. म्यूचुअल फण्ड की सामूहिक निवेश योजनाओ को पंजीकृत करना तथा उनका नियमन करना।
  • 5. प्रतिभूतियों के बाजार से सम्बंधित अनुचित व्यापार व्यवहारों (Unfair Trade Practices) को समाप्त करना।
  • 6. प्रतिभूति बाजार से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करना तथा निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
  • 7. प्रतिभूतियों की इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाना।

सेबी (संशोधन) अधिनियम, 2002[संपादित करें]

यह संसद में पारित होकर 29 अक्टूबर 2002 से लागू हुआ जो शेयर बाजार में गड़बड़ियों के दोषियों को अधिक कठोर सजा के लिए सेबी को व्यापक अधिकार उपलब्ध कराता है। इस अधिनियम के अंतर्गत इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए सेबी द्वारा 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। लघु निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में एक लाख रुपये प्रतिदिन की दर से, एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी इस अधिनियम में है। किसी भी शेयर बाज़ार को मान्यता प्रदान करने का अधिकार सेबी को प्रदान किया गया है।

इसके बाद १८ जुलाई २०१३ को सेबी की नियामक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए राषट्रपति द्वारा एक अध्यादेश जारी किया गया जिसके महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं–

  • विभिन्न योजनाओं के जरिये पूँजी जुटाने के नये-नये तरीकों, जो अभी तक ‘सेबी’ के दायरे में नहीं आते थे, अब ‘सेबी’ के दायरे में आयेंगे।
  • जनता से 100 करोड़ रुपये से अधिक धनराशी जुटाने वाली सभी योजनायें अब ‘सेबी’ के दायरे में लायी गयीं हैं।
  • सेबी को तलाशी, जब्ती व संपत्ति कुर्क करने का अधिकार है।
  • नियमों का पालन नहीं करने वालों को हिरासत में लेने का अधिकार भी सेबी को दिया गया है।
  • देश-विदेश के नियामकों से सूचनाएं मांगने की अनुमति भी ‘सेबी’ को प्रदान की गयी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]