भगोरिया

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भोंगर्या एक हाट बाजार मात्र है जिसमें होलीसे पूर्व पूजन सामग्री खरीदने के लिए जाते है यह मध्य प्रदेश के मालवा अंचल (धार, झाबुआ, खरगोन आदि) के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। भोंगर्या के समय धार, झाबुआ, खरगोन आदि क्षेत्रों के हाट-बाजार मेले का रूप ले लेते हैं और हर तरफ फागुन और प्यार का रंग बिखरा नजर आता है।

भोंगर्या हाट-बाजारों में युवक-युवती बेहद सजधज कर अपने अभिभावक के साथ होली की खरीदी करने आते हैं। साथ ही गणगोर के बाद होने वाली शादियों के लिए साज-श्रृंगार की वस्तुएं लेने भोगर्या हाट में आते है। जब होली का डंडा गढ़ जाता है तो सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं !! भोंगर्या हाट को लेकर समाज में भ्रम !!


⏩भोंगर्या हॉट को लेकर समाज में कई प्रकार के भ्रम फैले हुए हैं । वह चाहे आदिवासी समाज की बात हो या गैर आदिवासी समाज की बात हो कोई भी व्यक्ति इसके तहत तक जाना नहीं चाहता है । ⏩गैर आदिवासी समाज के लिये यह एक ऐसा बाजार हैं जिसमें साल भर में जितनी आय नहीं होती हैं,उससे कई गुना अधिक आय होती हैं एवं मनोरंजन का साधन है तो दूसरी तरफ आदिवासी समाज के लिए भोंगर्या हाट का अवसर पर जहरिली शराब, सड़ी गली सामग्री ,महंगे वस्त्र आदि अनावश्यक चीजों की खरीदी मे साल भर मे जितना खर्च नहीं करता है उससे अधिक खर्च कर देता । ⏩हमारे कुछ साथी जो जागरूक हैं किंतु हम क्या कर रहे हैं इस पर चिंतन नहीं करते हैं और इसे ही बढ़ावा देने में लगे हुए । ⏩ जबकि भोंगर्या हाट होलिका पूजन की सामग्री खरीदने का हॉट है । जिसमें सभी समाज के लोग भी होलिका पूजन की सामग्री खरीदते हैं। ⏩ इसे कुछ समय पहले तक आदिवासियों के वैलेंटाइन डे, प्रणय पर्व आदि नाम देकर दुष्प्रचारित किया जा रहा था। किंतु पिछले 10-12 वर्षों से समाज के जागरूक कार्यकर्ताओं द्वारा इस दुष्प्रचार के खिलाफ एवं समाज में जागरूकता को लेकर लगातार कार्य किया गया । पंपलेट छपवाकर बांटे गए, जगह- जगह पर सभाएं एवं मीटिंग का आयोजन कर, प्रेस वार्ताओं का आयोजन कर, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के रिपोर्टरों से बहस,शासन-प्रशासन,सुचना प्रसारण मंत्रालय से पत्राचार आदि के माध्यम से समाज में जागृति लाए एवं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया तथा शासन प्रशासन से भोंगर्या हाट की सच्चाई को लेकर तथ्य सामने लाएं । ⏩ भोंगर्या हाट को लेकर गलत स्टेटमेंट करने वाले विद्वानों एवं जनप्रतिनिधियों को एक के बाद एक लगातार सैकड़ों फोन लगाए जाते थे और शाम तक संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर बंद मिलता था । इस प्रकार एक बड़ा अभियान चलाया गया। ⏩ इसके बावजूद भी कुछ जगह पर गलत ढंग से खबरें छापी जाती है । किंतु इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्राय प्राय भ्रामक खबरों को छापने में कमी आई है ।

⏩ इसलिए समाज के जागरूक कार्यकर्ताओं से करबद्ध निवेदन है कि भोंगर्या हाट को लेकर फैलाई गई भ्रांतियों को दूर करने मे सहयोग प्रदान करें और इसे बढ़ावा देने का प्रयास ना करें तो समाज हित में होगा ।।bajavUwjJqoans

इतिहास[संपादित करें]

भोंगर्या पर लिखी कुछ किताबों के अनुसार भोंगर्या राजा भोज के समय लगने वाले हाटों को कहा जाता था। इस समय दो भील राजाओं कासूमार औऱ बालून ने अपनी राजधानी भागोर में विशाल मेले औऱ हाट का आयोजन करना शुरू किया। धीरे-धीरे आस-पास के भील राजाओं ने भी इन्हीं का अनुसरण करना शुरू किया जिससे हाट और मेलों को भोंगर्या कहना शुरू हुआ। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के द्वारा भ्रामक कहा जाता है है कि इस हाट बाजार में युवक-युवतियाँ अपनी मर्जी से भागकर शादी करते हैं ऐसा कुछ भी नही होता हैं यह सरासर गलत जानकारी हैं प्राचीन समय में आवागमन के साधन कम होने के कारण एक दिन बैलगाड़ी से पूरे परिवार के सदस्य आते हैं और अपने रिश्तेदारों से मिलने की खुशी में उन्हें पान खिलाया जाता था आदिवासी समाज में होली का डांडा गाड़ने के बाद कोई भी मांगलिक कार्य नही होता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]