प्रेम-प्रतिमा

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मुग़लकालीन भारतीय प्रेम-प्रतिमा एवं दर्शिल्दो

प्रेम-प्रतिमा एक प्रकार का मानव-आकार कामोत्तेजक उपकरण होता है। लिंग, योनि एवं/अथवा गुदा युक्त इस साधन का प्रयोग स्वतःमैथुन के लिए किया जाता है। सामान्यतः प्रेम-प्रतिमा एक संपूर्ण देह-रुपी पुतली होती है, परन्तु कुछ पुतलियों में केवल धड़, शीर्ष या अन्य आंशिक अंग ही होते हैं। कुछ पुतलियों में विभिन्न भागों को निकाला या लगाया जा सकता हैं।

इतिहास[संपादित करें]

मुग़लकालीन भारतवर्ष में रसिया व्यक्ति प्रेम-प्रतिमाओं का प्रयोग करते थे। सत्रहवीं सदी में स्पेनिश एवं फ्रेंच नाविक "डेम-दे-वोयाज" (जलयात्रा-सुन्दरी) नामक प्रेम-प्रतिमा का प्रयोग करते थे। लम्बी तथा एकाकी सागर-यात्राओं की अवधि में जब उन्हें काम-लालसा कष्ट देती थी, तो वे इसका सहारा लेकर समय बिताते थे।[1]

बीसवीं सदी में कारखानों में निर्मित प्रेम-प्रतिमाएँ लोकप्रिय हुईं। कहा जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाज़ी जर्मनी ने अपने सैनिकों के लिए प्रेम-प्रतिमाओं का उत्पादन किया, परन्तु श्री इवान ब्लोच के अनुसार विश्वसनीय सूत्रों द्वारा इस विवरण को सत्यापित नहीं किया गया है।[2]

१९७० के दशक तक विनाइल, लेटेक्स और सिलिकॉन से निर्मित यथार्थवादी प्रेम-पुतलियाँ का विक्रय होने लगा था।[1] एक बच्चा नीति के चलते चीन में प्रेम-प्रतिमाओं की लोकप्रियता में वृद्धि हुई। जापान में मूलतः प्रेम-प्रतिमाओं को "डच पत्नी" कहा जाता था। वर्त्तमान काल में इस शब्द को केवल हवा से भरी सस्ती गुड़िया के लिए प्रयुक्त किया जाता है। टोक्यो नगर में पुरुष प्रेम-प्रतिमाओं को किराए पर ले सकते हैं।[3][4][5]

आधुनिक युग में ग्राहक प्रेम-प्रतिमाओं को अंतरजाल पर खरीद सकते हैं। व्यक्तिगत पसंद के अनुकूल प्रतिमाओं के नाक-नक्श, सौंदर्य, केश रंग, काया वर्ण, कपड़े आदि चुने जा सकते हैं।[6] २१वीं सदी में रोबोट-रुपी प्रेम-प्रतिमाओं के लोकप्रिय होने की सम्भावना है।  [7]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Ferguson, Anthony. The Sex Doll: A History. McFarland, 2010. p 16. ISBN 978-0-7864-4794-7
  2. वेबैक मशीन पर Nazi sex doll story: das ist bogus - Boing Boing (सितंबर 3, 2011).Wayback Machine (archived September 3, 2011)
  3. Tokyo Times blog, 17 December 2004
  4. Japanorama, BBC Three, Season 3 Episode 2, first aired 26 March 2007
  5. Blow up love-doll business puts boom into boom-boom, Mainichi Shimbun, 6 March 2006
  6. "Photos of Inflated Dolls and Detailing". http://www.blowmeupsexdolls.com. 
  7. Habershon, Ed; Woods, Richard (2006-06-18). "No sex please, robot, just clean the floor — Times Online". The Times (London). http://www.timesonline.co.uk/article/0,,2087-2230715,00.html. अभिगमन तिथि: 2010-05-23.