प्राणचंद चौहान

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

प्राणचंद चौहान भक्तिकाल के कवि थे। वे रामायण महानाटक के रचयिता। इनके व्यक्तित्व पर पर्याप्त विवरण नहीं मिलता है।[1][2][3]

पं. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, संस्कृत में रामचरित संबंधी कई नाटक हैं। जिनमें कुछ तो नाटक के साहित्यिक नियमानुसार हैं और कुछ केवल संवाद रूप में होने के कारण नाटक कहे गए हैं। इसी पिछली पद्धति पर संवत 1667 (सन् 1610ई.) में प्राणचंद चौहान रामायण महानाटक लिखा।[4]


कृति[संपादित करें]

  • रामायण महानाटक

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 9 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2014.
  2. http://gandhigyan.gvpwardha.in/digital/?p=170 Archived 11 अगस्त 2014 at the वेबैक मशीन. रामभक्ति पंथी शाखा के प्रमुख कवि
  3. नागेन्द्र (1988). Indian Literature [भारतीय साहित्य]. प्रभात प्रकाशन. पृ॰ 619. मूल से 11 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2014.
  4. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (१९८५). रामचंद्र शुक्ल. नेशनल पब्लिशिंग हाउस. पृ॰ १६६.