पोरबन्दर

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Porbandar
પોરબંદર
सुदामापुरी
—  City  —
250px
उपनाम: pbr
पोरबन्दर is located in गुजरात
Porbandar
निर्देशांक : 21°37′48″N 69°36′0″E / 21.63°N 69.6°E / 21.63; 69.6Erioll world.svgनिर्देशांक: 21°37′48″N 69°36′0″E / 21.63°N 69.6°E / 21.63; 69.6
Country India
State Gujarat
District Porbandar
ऊँचाई 1
जनसंख्या (2011)
 • कुल 1,52,760
Languages
 • Official गुजराती · हिन्दी · अंग्रेजी
समय मण्डल IST (यूटीसी +5:30)
PIN 360575
वाहन पंजीकरण GJ-25
जालस्थल porbandar.gujarat.gov.in

पोरबन्दर गुजरात का एक शहर है। पोरबन्दर बहुत ही पुराना बंदरगाह हुआ करता था | पोरबन्दर मे गुजरात का सबसे आछा समुंद्र किनारा है | पोरबंदर गुजरात राज्य के दक्षिण छोर पर अरब सागर से घिरा हुआ है। पोरबंदर का निर्माण जूनागढ़ से हुआ था। पोरबंदर महात्मा गाँधीजी का जन्म स्थान है इसलिए स्वाभाविक रूप से पोरबंदर में उनके जीवन से जुड़े कई स्थान हैं जो आज दर्शनीय स्थलों में बदल चुके हैं। 10वीं शताब्दी में पोरबंदर को पौरावेलाकुल कहा जाता था और बाद में इसे सुदामापुरी भी कहा गया।

स्थिति[संपादित करें]

पोरबंदर गुजरात राज्य का एक ऐतिहासिक ज़िला है। पोरबंदर उत्तर-पश्चिम में देवभूमि द्वारका, उत्तर-पूर्व में जामनगर से, दक्षिण-पूर्व में जूनागढ़ से, पूर्व में राजकोट से और दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर से घिरा है।

इतिहास[संपादित करें]

महात्मा गाँधी के जन्म स्थल के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान पर 16वीं शताब्दी के आसपास जेठवा राजपूतों का नियंत्रण था। ज़िला बनने से पहले पोरबंदर भूतपूर्व पोरबंदर रियासत (1785-1948) की राजधानी था। पोरबंदर में गाँधीजी का तिमंजिला पैतृक निवास है जहाँ ठीक उस स्थान पर एक स्वस्तिक चिन्ह बनाया गया है जहाँ गाँधीजी की माँ पुतलीबाई ने उन्हें जन्म दिया था। लकड़ी की संकरी सीढ़ी अभ्यागतों की ऊपरी मंजिल तक ले जाती है, जहाँ गाँधीजी का अध्ययन कक्ष है। गाँधीजी के जन्म की स्मृति को अमर बनाने के लिए 79 फीट ऊँची एक इमारत का निर्माण उस गली में किया गया जहाँ 2 अक्टूबर 1869 को बापू का जन्म हुआ था। कीर्तिमंदिर के पीछे नवी खादी है जहाँ गाँधीजी की पत्नी कस्तूरबा गाँधी का जन्म हुआ था। पोरबंदर का महत्व केवल यहाँ तक सीमित नहीं है। भगवान श्री कृष्ण के बालसखा सुदामाजी भी यही के थे। इसलिए इसका महत्त्व सुदामापुरी के रूप में भी खास है।

यातायात और परिवहन[संपादित करें]

वायु मार्ग[संपादित करें]

सबसे नजदीकी हवाईअड्डा जामनगर हवाईअड्डा है और अच्छे रोड नेटवर्क की दृष्टि से राजकोट हवाईअड्डा नजदीक पड़ता है|

रेल मार्ग[संपादित करें]

पोरबंदर रेलवे स्टेशन एक टर्मिनस है। राजकोट और सोमनाथ के साथ साथ हावड़ा, दिल्ली सराई रोहिल्ला, मुजफ्फरनगर, सिकंदराबाद और कोचुवेली से पोरबंदर के लिए रेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग[संपादित करें]

राज्य परिवहन की बसें पोरबंदर को ज़िले व राज्य के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं। इसके अलावा हर घंटे नरसंग टेकरी से गैर-वातानुकूलित के साथ साथ आलिशान और वातानुकूलित निजी वॉल्वो बसे राजकोट और अहमदाबाद के लिए मिलती रहती है| जिसका आरक्षण PayTM, RedBus इत्यादि जैसी वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है| राजकोट और अहमदाबाद देश के सभी शहरो से जुड़े हुए है|

उद्योग और व्यापार[संपादित करें]

पोरबंदर शहर भवन निर्माण में काम आने वाले पत्थरों के लिए विख्यात है और पोरबंदर में कई प्रकार के उत्पादन का काम भी होता है।

जनसंख्या[संपादित करें]

2001 की गणना के अनुसार पोरबंदर की कुल जनसंख्या 5,36, 854 थी और 2011 की गणना के अनुसार 5,86,062 है|

पर्यटन[संपादित करें]

पोरबंदर का गुजरात के पर्यटन स्थलों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। पोरबंदर में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं। पोरबंदर में महात्मा गाँधी का जन्म स्थान है इसलिए स्वाभाविक रूप से यहाँ उनके जीवन से जुड़े कई स्थान हैं जो आज दर्शनीय स्थलों में बदल चुके हैं। पोरबंदर में गुजरात का सबसे अच्छा समुद्र तट है।

पोरबंदर के मंदिर[संपादित करें]

कीर्ति मंदिर[संपादित करें]

कीर्ति मंदिर पोरबंदर का प्रमुख आकर्षण केन्द्र है। कीर्ति मंदिर में एक गाँधीवादी पुस्तकालय और प्रार्थना कक्ष है। अन्दर प्रवेश करते ही गांधीजी और कस्तूरबा के सम्पूर्ण कद के तैलिचित्र दिखाई देते है। कीर्ति मंदिर परिसर में गांधीजी के बचपन का घर है और कस्तूरबा का घर भी परिसर के पीछे है। लगभग सभी कक्ष के अन्दर गांधीजी की अलग अलग समय की तसवीरे देखी जा सकती है।

घुमली गणेश मंदिर[संपादित करें]

घुमली गणेश मंदिर 10वीं शताब्दी के आरंभ में बना था। घुमली गणेश मंदिर गुजरात में आरंभिक हिन्दू वास्तुशिल्प का सुंदर नमूना है।

सूर्य मंदिर[संपादित करें]

सूर्य मंदिर का निर्माण 6ठीं शताब्दी में हुआ था। सूर्य मंदिर पोरबंदर से 50 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। सूर्य मंदिर पश्चिम भारत के आरंभिक मंदिरों में से एक है जो आज भी विद्यमान हैं।

सुदामापुरी[संपादित करें]

सुदामापुरी के मंदिर का निर्माण १९०२ से १९०७ के बिच यहाँ के जेठवा राजवंश ने किया था। यहाँ मंदिर प्रांगण में छोटीसी ८४ भूलभुलैया है, जो सुदामाजी के द्वारिका से वापसी के बाद अपनी कुटिया खोजने की बात को याद दिलाते है। सुदामाजी द्वारिका जाते समय एक मुठ्ठी तंदुल लेकर गए थे, आज भी मंदिर में तंदुल प्रसाद के तौर पर दिए जाते है।

संदीपनी विद्यानिकेतन[संपादित करें]

माननीय भाईश्री रमेशभाई ओझा द्वारा संचालित संदीपनी विद्यानिकेतन एक आध्यात्मिक तौर पर चलाया जानेवाला विद्यालय है, जो एरपोर्ट से २ किमी दूर रांघावाव नमक गाँव के पास है। ईस परिसर में हरिमंदिर है, जहा एक ही मंदिर में दाये से गणेश, चंद्रमौलीश्वर महादेव, राधाकृष्ण, लक्ष्मीनारायण, जानकीवल्लभ, करुणामयी माता और हनुमानजी के दर्शन होते है। मनोहर बगीचों और सायन्स गेलेरी का अपना सौन्दर्य अदभुत है। शाम को आरती के बाद मंदिर पर लाइट्स से फोकस किया जाता है, जो मन को आत्मविभोर बना देता है।

पोरबंदर के अभयारण्य[संपादित करें]

वर्धा वन्यजीव अभयारण्य[संपादित करें]

190 वर्ग किलोमीटर में फैला वर्धा वन्यजीव अभयारण्य पोरबंदर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। वर्धा वन्यजीव अभयारण्य गुजरात के दो ज़िलों- पोरबंदर और जामनगर का हिस्सा है। वर्धा वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर से खेत, बंजर भूमि और जंगल से घिरा हुआ हैं। चीते और भेड़िए जैसे संकटग्रस्त जन्तु यहाँ पाए जाते हैं।

पोरबंदर पक्षी अभयारण्य[संपादित करें]

पोरबंदर पक्षी अभयारण्य पोरबंदर के बीचों बीच स्थित है। पोरबंदर पक्षी अभयारण्य 9 एकड़ में फैला हुआ है।

पोरबंदर के महल[संपादित करें]

हुज़ूर महल[संपादित करें]

हुज़ूर महल एक विशाल इमारत है। हुज़ूर महल की छत लकड़ी की है और छत पर रेलिंग लगी हुई है।

दरबारगढ़ महल[संपादित करें]

दरबारगढ़ महल का निर्माण राणा सरतनजी ने करवाया था। दरबारगढ़ महल का प्रवेश द्वार पत्थर का बना हुई है जिस पर ख़ूबसूरत नक़्क़ाशी की गई है। दरबारगढ़ महल के द्वार के दोनों ओर ऊँची मीनारें और लकड़ी के विशाल दरवाजे हैं।

सतरनजी चोरो महल[संपादित करें]

राणा सतरनजी ने सतरनजी चोरो का निर्माण ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में करवाया था। सतरनजी चोरो तीन मंजिला इमारत है। सतरनजी चोरो राजपूत शैली में बनाया गया है।

पोरबंदर के समुद्री तट[संपादित करें]

माधवपुर तट[संपादित करें]

माधवपुर तट गुजरात के सर्वाधिक सुंदर और रेतीले तटों में से एक है। माधवपुर तट नारियल के पेड़ से घिरे हुए सुंदर रेतीले तट है। माधवपुर तट के पास ही माधवरायजी का मंदिर है।

पोरबंदर तट[संपादित करें]

पोरबंदर तट गुजरात के प्रमुख समुद्री तटों में से एक है। पोरबंदर तट वेरावल और द्वारिका के बीच स्थित एक सुंदर तट है। पोरबंदर तट गुजरात एक ऐसा तट है जहाँ अधिक छेड़छाड़ नहीं की गई है।

नेहरु तारामंडल[संपादित करें]

नेहरु तारामंडल सिटी सेंटर से 2 किलोमीटर दूर है। नेहरु तारामंडल में दोपहर में चलने वाला शो गुजराती भाषा में होता है। नेहरु तारामंडल पर दिन भर शो चलते रहते हैं।