नबी

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ईश्वर क गुणगान करने वाला

नबी (prophet) का अर्थ है ईश्वर का गुणगान करनेवाला, ईश्वर की शिक्षा तथा उसके आदेर्शों का उद्घोषक। बाइबिल ने उसे 'ईश्वर का मनुष्य' और 'आत्मा का मनुष्य' भी कहा गया है। यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम, प्राचीन यूनान, पारसी आदि धर्मों एवं संस्कृतियों में विभिन्न नबियों के होने के दावे किये गये हैं। ऐसी मान्यता है कि ईश्वर (या सर्वशक्तिमान) ने किसी व्यक्ति से सम्पर्क किया और भगवान की तरफ से उनको अपना सन्देशवाहक बनाया गया। इस प्रकार नबी ईश्वर और मानवजाति के बीच आधार जैसे कार्य का निष्पादन करने वाले थे।

परिचय[संपादित करें]

वास्तव में नबी ईश्वर का प्रवक्ता है जो ईश्वर की इच्छा प्रकट करता है और धार्मिक शिक्षा देता है। वह यदा कदा भविष्यवाणियाँ भी करता है। किंतु इसी के आधार पर नबी को भविष्यवक्ता (प्राफेट) नहीं कहा जाता। यद्यपि मूसा को भी नबी कहा गया है, तो भी इसराएल में नबियों का युग सामुएल (१०५० ई.पू.) के समय प्रारंभ होता है। कुछ नबी छोटे-छोटे समूहों में रहा करते थे और जनता के दानों से जीविका चलाते थे, दूसरे नबी गृहस्थ थे। वे छाल का लबादा पहना करते थे। उनके शरीर पर क्षतचिह्न स्पष्ट रूप से दिखाई दिया करते थे क्योंकि वे तपस्या के रूप में अपने शरीर पर घाव किया करते थे। ईश्वर की आत्मा से आविष्ट होकर जब वे भावसमाधि की दशा में पहुँच जाते थे तो वे गाने, नाचने या रोने लगते। उस समय वे कभी विचित्र चेष्टाएँ तथा प्रतीकात्मक कार्य भी संपन्न करते थे।

बाइबिल में झूठे नबियों की भी चर्चा है, जैसे बालदेवता के नबी। वे ईश्वर के नबियों की नकल करते थे और बुरी नीयत से ईश्वर की इच्छा की गलत व्याख्या किया करते थे। आठवीं शताब्दी ई.पू. से छठी श.ई.पू. तक नदियों का स्वर्णकाल है, १२ गौण नदियों के आमोस आदि) इसइया अथवा यशायाह (७४० ई.पू.) जेरेमियाह तथा यहेतकेल (५८० ई.पू.) जैसे महान नबी उस समय के हैं। वे ईश्वर के सच्चे भक्त थे और मूसा की परंपरा तथा उसके नैतिक एकेश्वरवाद को बनाए रखकर उसे विकसित करते थे।

४०० ई.पू. के बाद इसराएल में कोई नबी नहीं रहा, उनके स्थान पर कुछ मनीषी थे जो अपना ज्ञान ईश्वरप्रदत्त समझते थे और कभी-कभी अपने को नबी मानते थे।

बाइबिल के उत्तरार्ध (न्यू टेस्टामेंट) में नबी का अर्थ है - प्रकाशनों (रेवेलेशन) का घोषक तथा व्याख्याता, जो कभी-कभी भावी घटनाओं को भी प्रकट करता है। इस अर्थ में योहन बपतिस्ता नबी हैं। अधिकारपूर्ण शिक्षा तथा शक्तिशाली चमत्कारों के कारण ईसा को नबी और मसीह (महान् नबी) माना गया है।

प्रारंभिक ईसाई चर्च में उन लोगों को नबी कहते थे जिन्हें अपने भाइयों को शिक्षा, प्रोत्साहन तथा सांत्वना देने का वरदान प्राप्त था। वे कभी-कभी भावी घटनाओं को भी प्रकट करते थे।

पैगम्बर[संपादित करें]

पैगम्बर एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'पैगाम देने वाला'। इब्राहीमी धर्म जैसे यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म इत्यादि में इस शब्द का प्रयोग देखने को मिलता है। अर्थात, परमेश्वर, गॅड, अल्लाह, येहोवा द्वारा भेजा गया व्यक्ति जो मानव समाज को धार्मिक ज्ञान देने वाला माना जाता है। मुसलमानों का विश्वास है कि अल्लाह द्वारा 1 लाख 84 हजार पैगम्बर इस दुनिया में भेजे गये हैं जिसमें आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद हैं।

पैगम्बर, नबी, रसूल, इमाम जैसे शब्द हैं जो लगभग एक जैसे लगते हैं किन्तु उन के ग्रांथिक अर्थ और कार्य अलग अलग होते हैं। अंग्रेजी में पैगंबर का समान रूप अर्थ देने वाला शब्द है "प्रोफेट"। प्रोफेट का मतलब पैगाम देने वाला और प्रोफेसी करने वाला।

यह भी देखिये[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

 

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