पुष्यमित्र शुंग

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पुष्यमित्र शुद्र की मूर्ति

पुष्यमित्र शुद्र का अपभ्रम पुष्यमित्रशुंग है , यू तो कुछ अंग्रेजी इतिहासकारों ने पुष्यमित्र शुद्र को मनमानी ढंग ब्राह्मण साबित करने का भरपूर कोशिश किया, लेकिन भारत के इतिहास व वर्तमान में शुंग सरनेम का कोई ब्राह्मण नही पाया जाता है।

पुष्यमित्र शुद्र ही असली खलनायक है

न ही किसी सनातन धर्म ग्रंथो में शुंग सरनेम के ब्राह्मण का उल्लेख मिलता है, वास्तव में जिसको पुष्यमित्र शुंग कहा जाता है वह पुष्यमित्र शुद्र था, जिसने मौर्यवंश के 12 वे सम्राट वृहद्रथ मौर्य को मारकर शूद्र धनानंद की मौत का बदला लिया

उद्भव से सम्बंधित सिद्धान्त[संपादित करें]

पुष्यमित्र का शासन प्रबन्ध[संपादित करें]

साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। पुष्यमित्र प्राचीन मौर्य साम्राज्य के मध्यवर्ती भाग को सुरक्षित रख सकने में सफल रहा। पुष्यमित्र का साम्राज्य उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बरार तक तथा पश्‍चिम में पंजाब से लेकर पूर्व में मगध तक फ़ैला हुआ था। दिव्यावदान और तारानाथ के अनुसार जालन्धर और स्यालकोट पर भी उसका अधिकार था। साम्राज्य के विभिन्न भागों में राजकुमार या राजकुल के लोगो को राज्यपाल नियुक्‍त करने की परम्परा चलती रही। पुष्यमित्र ने अपने पुत्रों को साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सह-शासक नियुक्‍त कर रखा था। और उसका पुत्र अग्निमित्र विदिशा का उपराजा था। धनदेव कौशल का राज्यपाल था। राजकुमार जी सेना के संचालक भी थे। इस समय भी ग्राम शासन की सबसे छोटी इकाई होती थी।

इस काल तक आते-आते मौर्यकालीन केन्द्रीय नियन्त्रण में शिथिलता आ गयी थी तथा सामंतीकरण की प्रवृत्ति सक्रिय होने लगी थीं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]