परमेश्वर

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परमेश्वर का शाब्दिक अर्थ 'परम ईश्वर' है।

शैव सिद्धांत[संपादित करें]

भगवान शिव परमेश्वर की परिपूर्णता में

शैव सम्प्रदाय, हिंदू धर्म के 4 मुख्य सम्प्रदाय में से एक है। हिंदू धर्म की अन्य मुख्य सम्प्रदाय: वैष्णव सम्प्रदाय, स्मार्त सम्प्रदायशाक्त सम्प्रदाय हैं। शैव सम्प्रदाय में भगवान शिव को सर्वोच्च इश्वर माना जाता है। शैव सिद्धांत, शैव सम्प्रदाय के 6 मुख्य विचारधारा विद्यालयों में से एक है। शैव सिद्धांत के अनुसार भगवान शिव की 3 परिपूर्णता या पहलु हैं। यह तीन परिपूर्णता :- परशिव, पराशक्ति एवं परमेश्वर हैं। परमेश्वर व पराशक्ति की परिपूर्णता में भगवान शिव का आकार होता है परन्तु परशिव की परिपूर्णता में वे निराकार हैं। परमेश्वर की परिपूर्णता में वह मनुष्य के शरीर जैसा आकार लेते हैं जिसमें उनके हाथ में त्रिशूल, गले में सांप और हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में होता है।

परमेश्वर की परिपूर्णता में शिव में यह पाँच रूप या शक्तियाँ होती हैं:

परमेश्वर को शैव सिद्धांत में 'मूल आत्मा' भी कहा जाता है क्यों कि इस परिपूर्णता में भगवान शिव अपनी छवि और समानता में आत्माओं की रचना करते हैं और यह समस्त आत्माओं का प्रोटोटाइप है।[1] [2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Dancing with Siva". https://www.himalayanacademy.com/media/books/dancing-with-siva/web/ch02_04.html. 
  2. Subramanuyamswami, Sivaya (1997) (English में). Dancing with Siva. Himalayan Accademy. https://www.himalayanacademy.com/media/books/dancing-with-siva/web/ch02_01.html.