निर्मला जैन

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निर्मला जैन (जन्म 28 अक्टूबर 1932) हिन्दी साहित्य की अध्यापक, आलोचक और चर्चित आत्मकथा जमाने में हम[1] की लेखिका है।

जीवनी[संपादित करें]

निर्मला जैन का जन्म 28 अक्टूबर 1932 में दिल्ली के एक व्यापारी परिवार में हुआ। बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। उस ने दिल्ली में ही शिक्षा पूरी की और वर्षों कत्थक गुरु अच्छन महाराज (बिरजू महाराज के पिता) से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की।[2] उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए., पीएच.डी. और डी. लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। अध्यापन के क्षेत्र में निर्मला की पहली नियुक्ति लेडी श्रीराम कॉलेज में हुई। 14 साल (1956-70) तक उस कॉलेज में रहने के बाद वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में (1970-1996) रही। सेवानिवृत्त होने के बाद भी, वे विशेष आमन्त्रित रूप से दस वर्ष तक अध्यापन करती रहीं।

मुख्य कृतियाँ[संपादित करें]

आलोचना[संपादित करें]

  • आधुनिक हिंदी काव्य में रूप-विधाएँ
  • रस सिद्धांत और सौंदर्यशास्त्र
  • आधुनिक साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन
  • हिंदी आलोचना की बीसवीं सदी
  • आधुनिक हिंदी काव्य : रूप और संरचना
  • पाश्चात्य साहित्य चिंतन
  • कविता का प्रतिसंसार
  • कथा-समय में तीन हमसफ़र

संपादन[संपादित करें]

  • अंतस्तल का पूरा विप्लव : अँधेरे में
  • इतिहास और आलोचना के वस्तुवादी सरोकार
  • महादेवी साहित्य (महादेवी वर्मा का संपूर्ण साहित्य - चार खंडों में)
  • निबंधों की दुनिया

अनुवाद[संपादित करें]

  • उदात्त के विषय में
  • बंगला साहित्य का इतिहास
  • समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएँ
  • साहित्य का समाजशास्त्रीय चिंतन
  • भारत की खोज

सम्मान[संपादित करें]

  • हरजीमल डालमिया पुरस्कार
  • तुलसी पुरस्कार
  • रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार
  • सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार
  • साहित्य भूषण सम्मान
  • विशिष्ट साहित्यकार सम्मान (हिंदी अकादेमी, दिल्ली)
  • सुब्रह्मण्यम भारती (केंद्रीय हिंदी संस्थान)

सन्दर्भ[संपादित करें]