नारायण आप्टे

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नारायण आप्टे
Narayan Apte.jpg
नारायण आप्टे
जन्म 1911
मृत्यु 15 नवम्बर 1949(1949-11-15) (उम्र 38)
अम्बाला जेल, पूर्वी पंजाब, भारत
(अब हरियाणा में)
मृत्यु का कारण फाँसी
राष्ट्रीयता Indian
प्रसिद्धि कारण महात्मा गांधी की हत्या

नारायण दत्तात्रय आप्टे (१९११ - १९४९) हिन्दू महासभा के एक कार्यकर्ता थे।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इन्हें गांधी-हत्या के मामले में नाथूराम गोडसे के साथ फाँसी दे दी गयी थी।

अदालत में जब गांधी-वध का अभियोग चला तो मदनलाल पाहवा ने उसमें स्वीकार किया कि जो भी लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे, पूर्व योजनानुसार उसे केवभा में गडबडी फैलाने का काम करना था, शेष कार्य अन्य लोगों के जिम्मे था। जब उसे छोटूराम ने जाने से रोका तो उसने जैसे भी उससे बन पाया अपना काम कर दिया। उस दिन की योजना भले ही असफल हो गयी हो परन्तु इस बात की जानकारी तो सरकार को हो ही गयी थी कि गान्धी की हत्या कभी भी कोई कर सकता है फिर उनकी सुरक्षा की चिन्ता आखिरकार किन्हें करनी चाहिये थी?

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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