दिगम्बर बड़गे

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गन्धी-वध के अभियुक्तों का एक समूह चित्र।
खड़े हुए : शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बड़गे.
बैठे हुए: नारायण आप्टे, वीर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु रामकृष्ण करकरे

दिगम्बर बड़गे (तमिल: திகம்பர் பேட்ஜ்) हिन्दू महासभा के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। जब इन पर गान्धी-वध के मामले में मुकदमा चलाया गया तो ये सरकारी गवाह बन गये और उन्होंने मामले में सभी अभियुक्तों के नाम बता दिये जिसके चलते मामला शीघ्रता से सुलझ गया।

अदालत में जब गान्धी-वध का अभियोग चला तो मदनलाल पाहवा ने उसमें स्वीकार किया कि जो भी लोग इस षड्यन्त्र में शामिल थे पूर्व योजनानुसार उसे केवल बम फोडकर सभा में गडबडी फैलाने का काम करना था, शेष कार्य अन्य लोगों के जिम्मे था। जब उसे छोटूराम ने जाने से रोका तो उसने जैसे भी उससे बन पाया अपना काम कर दिया। उस दिन की योजना भले ही असफल हो गयी हो परन्तु इस बात की जानकारी तो सरकार को हो ही गयी थी कि गान्धी की हत्या कभी भी कोई कर सकता है फिर उनकी सुरक्षा की चिन्ता आखिरकार किन्हें करनी चाहिये थी?

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