नवयान

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नवयान या भीमयान या नवबुद्ध"' भारत का बौद्ध धर्म का सम्प्रदाय हैं। नवयान का अर्थ है– नव = नया या शुद्ध, यान = मार्ग या वाहन। नवबुद्ध का अर्थ है– नव = नया या शुद्ध, बुद्ध का मतलब बोधि से है, जो गौतमबुद्ध को प्राप्त हुआ था। भारत मे बौद्धिष्ट बनने के लिए, बाबा साहब अम्बेडकर की बनाई 22 हिन्दू धार्मिक विरोधी शपथ लेना अनिवार्य है। हालांकि बाबा साहब द्वारा बनाई गयी 22 शपथों में से ज्यादातर गौतमबुद्ध के धम्म के विपरीत है। नवयान को भीमयान नवबुद्ध या आंबेडकरवाद भी कहते हैं। नवयानी बौद्ध अनुयायिओं को नवबौद्ध (नये बौद्ध) भी कहा जाता, क्योंकि वे छह दशक पूर्व ही बौद्ध बने हैं। नवयान को भीमयान नाम डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के मूल भीमराव से पड़ा हैं। यह सम्प्रदाय महायान, थेरवाद और वज्रयान से पूर्णत अलग हैं किंतु इसमें इन तीनों सम्प्रदायों में से बुद्ध के मूल सिद्धांतो के साथ केवल विज्ञानवादी एवं तर्कशुद्ध सिद्धांत ही लिए गये हैं। इस सम्प्रदाय में किसी भी प्रकार का अंधविश्वास या कुरितीयों को कोई स्थान नहीं हैं। नवयान बौद्ध धर्म के सुरूवात या स्थापना बोधिसत्त्व डॉ॰ भीमराव आंबेडकर ने की थी। उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को दीक्षाभूमि, नागपुर में अपने पांच लाख अनुयायिओं के साथ बौद्ध धर्म का अंगिकार किया था। इससे भारत में बौद्ध धर्म का पुनरूत्थान हुआ हैं।

डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को बौद्ध धर्म स्विकार करने से पहले एक दिन पूर्व एक पत्रकार ने पूछा था की, ‘आप जो बौद्ध धर्म अपनाने वाले है वो महायान बौद्ध धर्म होगा या हीनयान बौद्ध धर्म ?’ उत्तर में भीमराव ने कहां की, ‘‘मेरा बौद्ध धर्म न तो महायान होगा और न ही हीनयान होगां, इन दोनों संप्रदायों में कुछ अंधविश्वासी बातें हैं इसलिए मेरा ये बौद्ध धर्म नवयान बौद्ध धर्म होंगा। जिसमें किसी बुद्ध के मूल सिद्धांत और केवल विवेकवादी सिद्धांत ही होंगे, कोई भी कुरितीयों या अंधविश्वास नहीं होंगा। यह एक ‘शुद्ध बौद्ध धर्म’ होंगा।’’ पत्रकार ने फिर पूछां, “क्या हम इसे 'भीमयान' कह सकते हैं?” “आप कह सकते हैं, पर मैं नहीं कहूँगा।, क्योंकि मैं खुद को गौतम बुद्ध समान खड़ा नहीं कर सकता।” डॉ॰ भीमराव ने जबाब दिया। भारतीय बौद्ध या नवयानी बौद्ध अनुयायि बोधिसत्व डॉ. भीमराव आंबेडकर जी को गौतम बुद्ध के समान ही सन्मान देते है, क्योंकि बुद्ध और भीमराव दोनों ही भारतीय बौद्धों के श्रेष्ठतम् गुरु है।

शुरूवात[संपादित करें]

वर्तमान भारत में जब-जब भगवान बुद्ध को स्मरण किया जाता है, तब-तब स्वाभाविक रूप से डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी का भी नाम लिया जाता है। क्योंकि स्वतंत्रता के बाद बहुत बड़ी संख्या में एक साथ डॉ॰ आंबेडकर के नेतृत्व में ही बौद्ध धम्म परिवर्तन हुआ था। 14 अक्तूबर, 1956 को नागपुर में यह दीक्षा सम्पन्न हुई। भीमराव के 5,00,000 समर्थक बौद्ध बने है, उगले 2,00,000 फिर तिसरे दिन 16 अक्टूबर को चंद्रपूर में 3,00,000। इस तरह कुल 10 लाख से भी अधिक लोग भीमराव ने केवल तीन दिन में बौद्ध बनाये थे। भारत में बौद्ध धर्म का पुनरूत्थान या पुनर्जन्म हुआ। एक अनुमान के अनुसार मार्च 1959 तक करीब 1.5 से 2 करोड़ दलित एवं अन्य समाज के लोग बौद्ध बने और आज बौद्ध धर्म भारत के प्रमुख धर्मों में से एक है तथा भारत में तिसरा सबडे बड़ा धर्म है।

धर्मग्रंथ[संपादित करें]

1. भगवान बुद्ध और उनका धम्म

यह ग्रंथ भारतीय बौद्ध अनुयायिओं का धर्म ग्रंथ हैं, जिसे डॉ॰ भीमराव आंबेडकर ने लिखा हैं।

2. भीमायन

यह डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के कार्य, जीवनी और आंदोलन को समर्पित हैं।[1]

3. नवयान[2]

सिद्धांत[संपादित करें]

मैं स्वीकार करता हूँ और बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करूंगा। मैं हीनयान और महायान, दो धार्मिक आदेशों की अलग अलग राय से मेरे लोगों को दूर रखूंगा। हमारा बौद्ध धर्म एक नया बौद्ध धर्म, नवयान है।|डॉ॰ भीमराव आंबेडकर|शाम होटल, नागपुर में 13 अक्टूबर 1956 को प्रेस साक्षात्कार[3]

बौद्धों का विकास[संपादित करें]

दलितों को लगने लगा है कि हिंदू धर्म से बाहर निकलना उनके लिए बेहतर रास्ता हो सकता है क्योंकि बीते सालों में नवबौद्धों की हालत सुधरी है जबकि हिंदू दलितों की जिंदगी वोट बैंक के रूप संगठित होने के बावजूद ज्यादा नहीं बदली है। 125वी आंबेडकर जयंती पर रोहित वेमुला की मां और भाई ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया है।

बौद्धों का जीवन सुधार [4][संपादित करें]

सन 2001 की जनगणना के मुताबिक देश में बौद्धों की जनसंख्या अस्सी लाख है जिनमें से अधिकांश बौद्ध (नवबौद्ध) यानि हिंदू दलितों से धर्म बदल कर बने हैं।

सबसे अधिक 59 लाख बौद्ध महाराष्ट्र में बने हैं। उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 लाख के आसपास नवबौद्ध हैं फिर भी कई इलाकों में उन्होंने हिंदू कर्मकांडों को छोड़ दिया है। पूरे देश में 1991 से 2001 के बीच बौद्धों की आबादी में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। [5]

1. लिंग अनुपात

हिन्दू दलितों के 936 की तुलना में बौद्धों के बीच महिला और पुरुष का लिंग अनुपात 953 प्रति हजार है। यह सिद्ध करता है कि बौद्ध परिवारों में महिलाओं की स्थिति में अब तक हिन्दू दलितों की तुलना में बेहतर है। यह काफी बौद्ध समाज में महिलाओं की उच्च स्थिति के अनुसार है। बौद्धों का यह अनुपात हिन्दुओं (931), मुसलमानों (936), सिख (893) और जैन (940) की तुलना में अधिक है।

2. बच्चों का लिंग अनुपात (0-6 वर्ष)

2001 की जनगणना के अनुसार बौद्धों के बीच लड़कियों और लड़कों का लिंग अनुपात 942 है, हिन्दू दलितों के 938 के मुकाबले के अनुसार यह अधिक हैं। यह लिंग अनुपात हिन्दुओं (925), सिख (786) की तुलना में बहुत अधिक है, और जैन (870)। यह हिंदू दलित परिवारों के साथ तुलना में है कि लड़कियों को बौद्धों के बीच बेहतर देखभाल और संरक्षण का परिणाम हैं।

3. साक्षरता दर

बौद्ध अनुयायिओं की साक्षरता दर 72.7 प्रतिशत है जो हिन्दू दलितों (54.70 प्रतिशत) की तुलना में बहुत अधिक है। इस दर में भी हिंदुओं (65.1), मुसलमानों (59.1) और सिखों (69.4) की तुलना में काफी ज्यादा यह पता चलता है कि बौद्ध धर्म हिन्दू दलितों से भी अधिक साक्षर हैं।

4. महिलाओं की साक्षरता 

बौद्ध महिलाओं की साक्षरता दर के रूप में हिंदू दलित महिलाओं के 41.9 प्रतिशत की तुलना में 61.7 प्रतिशत है। यह दर हिंदुओं (53.2) और मुसलमानों (50.1) की तुलना में भी अधिक है। यह बौद्ध समाज में महिलाओं की स्थिति के अनुसार है। इससे पता चलता है कि बौद्धों के बीच महिलाए हिंदू दलित महिलाओं की तुलना में अधिक शिक्षित हो रही है।

5. काम में भागीदारी दर

बौद्धों के लिए यह दर 40.6 प्रतिशत सबसे अधिक है जो हिन्दू दलितों के लिए अधिक से अधिक 40.4 प्रतिशत है। यह दर हिंदुओं (40.4), मुसलमानों (31.3) ईसाई (39.3), सिख (31.7) की तुलना में भी अधिक है, और जैन (32.7)। यह साबित करता है कि बौद्ध धर्म हिन्दू दलितों से भी अधिक कार्यरत हैं।

इससे पता चलता हैं की, शोषितों एवं दलितों के मसिहा डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने दलितों के उत्थान या प्रगती के लिए जो महान बौद्ध धर्म दिया था, ओ दलितों के पिडा हरने में सही साबीत हुआ हैं। हालांकी, आज दलितों के छोटे हिस्से ने ही बौद्ध धर्म अपनाया हैं, और ओ बौद्ध समूह हिंदू दलितों से बेहतर और सबसे बेहतर बन रहा हैं।

जनसंख्या[संपादित करें]

भारतीय बौद्धों में 95% से अधिक नवयानी बौद्ध हैं। 2011 की भारतीय जनगनणा के अनुसार भारत में ‘अधिकृत’ बौद्ध करीब 85 लाख 0.7% हैं, लेकिन अन्य सर्वेक्षण और बौद्ध विद्वानों ने अनुसार भारत में 5% से 7% या 6 करोड़ से ८ करोड़ बौद्ध हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]