तिरुक्कुरल

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तिरुक्कुरल, तमिल भाषा में लिखित एक प्राचीन मुक्तक काव्य रचना है। तिरुवल्लुवर इसके रचयिता थे। इसकी रचना का काल ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईसा की छठवीं शताब्दी हो सकती है। इसके सूत्र या पद्य, जीवन के हर पहलू को स्पर्श करते हैं। यह नीतिशास्त्र की महान रचना है।

जैन[संपादित करें]

कई विद्वान तिरुक्कुरल को एक जैन रचनाकार माना जाता हैं।[1] [2] इसका प्रथम अध्याय ईश्वर-स्तुति है, जिसमे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की स्तुति की गयी है।[3]

विभाग[संपादित करें]

तिरुक्कुरल तीन भागों में विभक्त है - धर्म, अर्थ तथा काम

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Tirukkural, Vol. 1, S.M. Diaz, Ramanatha Adigalar Foundation, 2000,
  2. Swaminatha Iyer,Tiruvalluvar and his Tirukkural, Bharatiya Jnanapith, 1987
  3. तिरुवल्लुवर (2014). कुरल काव्य. भारतीय ज्ञानपीठ. pp. 8–18, 21. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-263-5254-3. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]