तनोट माता

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तनोट माता
Tanot-mata(raju-suthar).jpg
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताहिन्दू धर्म
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिजैसलमेर, भारत

तनोट माँ (तन्नोट माँ) का मन्दिर जैसलमेर जिले से लगभग एक सौ तीस कि॰मी॰ की दूरी पर 'तनोट' नामक गाँव में स्थित हैं। इस मन्दिर को 'तनोट राय' कहते हैं। मामडिया चारण की पुत्री देवी आवड़ को तनोट माता के रूप में पूजा जाता है। पुराने चारण साहित्य के अनुसार तनोट माता, हिंगलाज माता की अवतार हैं जिनका प्रसिद्ध मन्दिर बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में है। भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने वि॰सं॰ 828 में तनोट का मंदिर बनवाकर मूर्ति को स्थापित किया था। भाटी तथा जैसलमेर के पड़ोसी क्षेत्रों के लोग तन्नोट माता की पूजा करते हैं।

भारत-पाक लड़ाई और माता का चमत्कार[संपादित करें]

माना गया है कि भारत और पाकिस्तान के मध्य जो सितम्बर 1965 को लड़ाई हुई थी , उसमें पाकिस्तान के सैनिकों ने मंदिर पर कई बम गिराए थे लेकिन माँ की कृपा से एक भी बम नहीं फट सका था। तभी से सीमा सुरक्षा बल के जवान इस मन्दिर के प्रति काफी श्रद्धा भाव रखते हैं। [1]

इतिहास[संपादित करें]

मंदिर के एक पुजारी ने मंदिर के इतिहास के बारे में उल्लेख किया कि बहुत समय पहले एक मामड़िया चारण नाम का एक चारण था, जिनके कोई 'बेटा-बेटी' अर्थात कोई संतान नहीं थी, वह संतान प्राप्ति के लिए लगभग सात बार हिंगलाज माता की पूरी तरह से पैदल यात्रा की। एक रात को जब उस चारण (गढवी ) को स्वप्न में आकर माता ने पूछा कि तुम्हें बेटा चाहिए या बेटी, तो चारण ने कहा कि आप ही मेरे घर पर जन्म ले लो।

हिंगलाज माता की कृपा से उस चारण के घर पर सात पुत्रियों और एक पुत्र ने जन्म लिया। इनमें से एक आवड मा थी जिनको तनोट माता के नाम से जाना जाता है।

घूमने के लिए है अच्छी जगह[संपादित करें]

अगर आप तनोत माता के दरबार में धोक देने आने वाले हैं यह आपके लिए एक अच्छा पर्यटन स्थल है। तनोत माता के दरबार में आने के लिए जैसलमेर से गाडी से या आप अपनी खुद की गाड़ी लेकर आ सकते हैं।

तनोत माता को 'रक्षा की देवी' भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच में हुए घमासान युद्ध के समय माता के दरबार में पाकिस्तान की ओर से कई बम फेंके गये, पर माता जी मंदिर को कुछ नही हुआ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

तनोटमाता का जन्म स्थान चालकना बाडमेर राजस्थान माना जाता है वि. से. 808 में मामड़ जी घर जन्म हुआ