जिमीकंद

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ओल का पौधा

जिमीकंद एक बहुवर्षीय भूमिगत सब्जी है जिसका वर्णन भारतीय धर्मग्रंथों में भी पाया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में जिमीकंद के भिन्न-भिन्न नाम ओल या सूरन हैं। पहले इसे गृहवाटिका में या घरों के अगल-बगल की जमीन में ही उगाया जाता था। परन्तु अब तो जिमीकंद की व्यवसायिक खेती होने लगी है। जिमीकंद एक सब्जी ही नहीं वरन यह एक बहुमूल्य जड़ीबूटी है जो सभी को स्वस्थ एवं निरोग रखने में मदद करता है।

भोज्य पदार्थों के संचन हेतु यह भूमिगत तना का रूपांतर है जिसे घनकंद कहते हैं। यह परिवर्तित तना बहुत अधिक जैसा-तैसा फूला रहता है एवं इसकी सतह पर पर्वसंधियाँ रहती हैं जिनपर शल्क-पत्र लगे रहते हैं। सतह पर जहाँ-तहाँ अपस्थानिक जड़ें लगी रहती हैं। अगले सिरे पर अग्रकलिका तथा शल्कपत्रों के अक्ष पर छोटी-छोटी कलिकाएँ होती हैं। इस पौधे का फल यानी जड़ को बवासीर के दवा में भी उपयोग किया जाता है।

बड़े आकार की जिमीकंद की खेती कैसे करें

जिमीकंद खेती अप्रैल मई के महीने मे शुरू की जाती है जिमीकंद लगाने हेतु कंद का ही उपयोग की जाती है ज्यादातर किसान छोटे कंद का उपयोग जिमीकंद लगाने हेतु करते हैं जिस वजह से जिमीकंद ज्यादा वजन में नहीं मिल पाता इसलिए हमें जब भी जिमीकंद की खेती शुरू करनी है तो कंद कम से कम डेढ़ किलो का उपयोग में लेनी चाहिए बड़े कंद का उपयोग खेती में बीज के रूप में उपयोग करने से सात से आठ महीना उपरांत हमें बड़े आकार की जिमीकंद की उपज प्राप्त हो सकती है

बड़े जिमीकंद की खेती की तैयारी कैसे करें

जिमीकंद की खेती हेतु उपयुक्त भूमि जल निकासी युक्त होनी चाहिए जल निकासी युक्त भूमि में खेती करने से जिमीकंद की के पौधे की वृद्धि दर अच्छी रहती है जिमीकंद की बुवाई से पहले हमें जिमीकंद के कांदा डेढ़़ किलो केेे अनुपात से बड़े कांदा की कटाई कर अलग कर देनी चाहिए

एक से डेढ़ फीट की गड्ढा तैयार कर उसमें फसलों के अवशिष्ट पदार्थ डाल के उसके उपरांत जिमीकंद के बीज का रोपण कर मिट्टी और खाद से फसल की बुवाई कर देनी चाहिए ।इस विधि से जिमीकंद की खेती करने से अत्याधिक मात्रा में उत्पादन प्राप्त होता है [1]

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