चिकनास

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चिकनास,डेगाना,तहसिल,जिला,नागौर, राज्य,राजस्थान, भारत का एक,छोटा, सा गांव हे। यह सारसण्डा से ४,किलोमिटर ,पुर्वमे तथा, बंवरलासेकिलोमिटर,पश्चिम, मे, स्थितहे

इतिहास[संपादित करें]

चिकनास ग्राम की स्थापना भेरूनाथजी महाराज ने की थी। यह बहुत पुराना इतिहास हे। भेरुनाथजी महाराज नाथ समाज के महान सन्त थे। उन्होने बाद मे जिवित समाधी ले ली। आज भी उनका समाधी स्थल विधमान हे। उनको भेरुनाथजी, तथा चोका महाराज के नाम से भी जानते हे। यह ग्राम बहुत विकसित था। यहा पर नाथ [सुण्डा- गोत्र]], जाट, राजपुत, रावणा राजपुत, मेघवाल और सान्सी जातियो के लोग रह्ते थे। पुरा गाव खुशहाल था। सब लोग हिलमिल कर भाईचारे के साथ रह्ते थे। लेकिन विधि को कुछ और मन्जूर था। अकाल पर अकाल पड्ते गये। लोगो के पास पानी की विकट समस्या पेदा हो गई। लोग मजबूर हो गये। आखिरकार कुछेक तो जमीन को कोडी के भाव बेचकर मोडी और भेन्डा आदि जगहे चले गये। तथा कुछ नाथ और राजपुत जमीन को बेचना नही चाह्ते थे। अत: वे नजदीक के ग्राम सारसण्डा मे बस गये। लेकिन जमीन आज भी चक चिकनास मे हे। अतः पुरा ग्राम खाली हो गया। केवल सान्सी जाति नही गई। आज चिकनास मे केवल सान्सी जाति के लोग रह्ते हे।

ग्राम के धार्मिक स्थल यहा प‍र भेरुनाथजी (चोका महाराज) का स्माधी स्थल हे। ह्‍रेक जाति के लोग नाथजी महाराज का दर्शन करने आते हे। तथा अपनी मनोकामना पुरी करते हे। यहा पर पाबुजी, पिपलिया भेरूजी, का भी स्थान हे।

ग्राम कि वर्तमान दशा आज चिकनास ग्राम क दशा ठीक हे सरकारी सहयोग से एक विधालय शुरु हुआ हे। पिने के पानी के लिये पालोलाब तालाब खुदवाया गया। हालाकी इस तालाब की नीव सिलगावा जाति के जाट ने रखी थी। इसके अलावा नल की सुविधा भी हो गई। जो खारा पानी ग्राम सारसण्डा से आता हे। और बिजली कि भी सुविधा हो गई। लेकिन ग्राम मे रोजगार का अभाव हे। रोजगार मे मुख्तया खेती और मोची का कार्य हे। यातायात कि सुविधा अच्छी हो गई। एक डामर सडक का निर्माण हो गया। जो सारसण्डा के बन्वरला को जोडती हे।

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