गोला गोकर्णनाथ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
गोला गोकर्णनाथ
छोटी काशी
—  उत्तर प्रदेश का एक नगर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला लखीमपुर खीरी
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्रीमती मीनाक्षी अग्रवाल जी

निर्देशांक: 28°05′N 80°28′E / 28.08°N 80.47°E / 28.08; 80.47

गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित यह नगर पालिका परिषद व तहसील भगवान शिव के मंदिर और बजाज हिन्दुस्तान लिमिटेड के चीनी मिल के लिए जाना जाता है।

गोला गोकर्णनाथ स्थित शिव प्रतिमा

गोली गांव जो कि शिव मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित था..तथा अकाल के कारण स्थान छोड़ कर गांव की आवादी..नागा बाबाओं की मदद के चलते..शिव मंदिर के आसपास बस गयी..समय बीता..नया नाम पड़ा गोला जो आज प्रचलित है। मेरीविवेक सिंह

जनसांख्यिकीय[संपादित करें]

भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार गोला गोकर्णनाथ की जनसंख्या 53,832 है जिसमें 53% पुरुष व 47% महिलाएं हैं। यहाँ की औसत साक्षरता 68% है जो कि राष्ट्रीय दर 59.5% से अधिक है इसमें पुरुषों व महिलाओं की साक्षरता क्रमश: 73 % व 62 % है। 14% जनसंख्या 6 वर्ष आयु से कम वालों की है।

इतिहास[संपादित करें]

त्रेता युग में राम-रावण युद्ध के समय रावण ने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया ताकि वह युद्ध जीत सके। शिवजी ने शिवलिंग का आकार लेकर रावण को लंका में शिवलिंग स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके लिए भगवान शिव ने एक शर्त रखी कि शिवलिंग को बीच में कहीं पर भी नीचे नहीं रखना है। लेकिन रास्ते में रावण को पेशाब लगी तो उसने एक गड़रिये को शिवलिंग पकड़ने को कहा। कहते हैं कि भगवान शिव ने अपना वजन बढ़ा दिया और गड़रिये को शिवलिंग नीचे रखना पड़ा। रावण को भगवान शिव की चालाकी समझ में आ गयी और वह बहुत क्रोधित हुआ। रावण समझ गया कि शिवजी लंका नहीं जाना चाहते ताकि राम युद्ध जीत सकें। क्रोधित रावण ने अपने अंगूठे से शिवलिंग को दबा दिया जिससे उसमें गाय के कान (गौ-कर्ण) जैसा निशान बन गया। गड़रिये को मारने के लिए रावण ने उसका पीछा किया। अपनी जान बचाने के लिए भागते समय वह एक कुएं में गिर कर मर गया। आज भी हर साल वहाँ पर मेला लगता है।

वराह पुराण की एक कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर ने तीन सींगों वाले एक मृग का रूप धारण कर लिया| देवतागण विष्णु के नेतृत्व में उन्हें खोजने पृथ्वी पर आये| ब्रह्मा और इंद्र मृगरुपी शिव के दो सींग पकड़ लिए| तभी शंकर अपने तीनों सींग छोड़ कर अदृश्य हो गए| ये सींग लिंगरूप में बदल गए| देवताओं ने शिव के तीन लिंगों में से यहाँ गोकर्णनाथ में स्थापित किया, दूसरा शुंगेश्वर (भागलपुर, बिहार में और तीसरा शिवलिंग इंद्र इन्द्रलोक ले गए| जब रावण ने इंद्र पर विजय हासिल की तो इन्द्रलोक से वह तीसरा सींग (गोकर्ण लिंग) उठा लाया किन्तु लंका के मार्ग पर जाते हुए भूल से उसने इसी गोकर्ण क्षेत्र में भूल से भूमि पर रख दिया| शिव तब यहीं स्थिर हो गए।

तीर्थस्थल[संपादित करें]

यहाँ के बड़े से सरोवर के किनारे श्रीगोकर्णनाथ महादेव का बड़ा मंदिर है| ८ किलोमीटर की परिधि में ५ प्राचीन कुंड हैं- जहाँ हर कुंड के पास शिवालय हैं। गोकर्णनाथ महादेव के अलावा अन्य ४ शिव मंदिर हैं- देवेश्वर महादेव/गदेश्वर महादेव/बटेश्वर महादेव और स्वर्णेश्वर महादेव (स्वर्ण+ईश्वर = स्वर्णेश्वर)मन्दिर लक्ष्मणजती मन्दिर व प्राचीन बाबा भूतनाथ मन्दिर।

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

गोला गोकर्णनाथ 28.080 उत्तर व 80.470 पूर्व पर स्थित है। ऊष्णकटिबन्धी वनों द्वारा घिरा, लखीमपुर खीरी जिले का दूसरा सबसे बड़ा, तहसील स्तर का यह शहर एक छोटी नदी सरैंया के तट पर स्थित है।

जलवायु[संपादित करें]

यहाँ की जलवायु बहुत गरम है। ग्रीष्म ॠतु (जून-अगस्त) में यहाँ का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस – 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है पर हिमालय के तराई क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहाँ का तापमान उत्तर भारत के अन्य स्थानों की तुलना में कम ही रहता है। शीत ॠतु में यहाँ का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से 17 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

उद्योग[संपादित करें]

यहाँ स्थित बजाज हिन्दुस्तान लिमिटेड का चीनी मिल सम्भवत: एशिया का सबसे बड़ा चीनी मिल है

भाषा[संपादित करें]

यहाँ की प्रमुख भाषा हिन्दी और अवधी (हिन्दी की एक उपभाषा) है। ज्यादातर विस्थापित लोग पंजाबी बोलते हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

गोला गोकर्णनाथ में बहुत से स्कूल व कॉलेज हैं पर विज्ञान विषयों की उच्च शिक्षा की व्यवस्था की यहाँ पर कमी है। कृषक समाज इण्टर कॉलेज, पब्लिक इण्टर कॉलेज, लाल बहादुर शास्त्री इण्टर कॉलेज, सेण्ट जॉन कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर, सरस्वती विद्या निकेतन, गांधी विद्यालय, गुरुनानक बालिका इण्टर कॉलेज, सी जी नेहरू, गुरु नानक व हरकिशन सिंह परास्नातक विद्यालय यहाँ के प्रमुख शिक्षा संस्थान हैं।

== सन्दर्भ == यह नगर गंगा-यमुना तहजीब की अनुपम छटा बिखेरता है। और शहर के आकर्षण का केंद्र शहर में आयोजित होने वाला प्रतिवर्ष ऐतिहासिक चेती मेला है। जोकि नगर पालिका परिषद द्वारा प्रतिवर्ष होलिका दहन के पश्चात चैत माह में (मार्च-अप्रैल महीने में) बड़ी धूमधाम के साथ आयोजित किया जाता है। गोला गोकर्ण नाथ उत्तर प्रदेश तीर्थ की सूची में वर्तमान में सम्मिलित है। और वर्तमान प्रयास यह है कि इस शहर को पर्यटन नगरी का दर्जा प्राप्त हो सके।