कॅप्लर-१६ तारा

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कॅप्लर-१६ मंडल का काल्पनिक चित्रण: सबसे पीछे नारंगी बौना तारा, उसके आगे लाल बौना तारा और सबसे आगे कॅप्लर-१६बी गैस दानव ग्रह है

कॅप्लर-१६ (Kepler-16) एक द्वितारा मंडल है जिस पर कॅप्लर अंतरिक्ष यान द्वारा खगोलशास्त्री अध्ययन कर रहें हैं। आकाश में यह हंस तारामंडल के क्षेत्र में पड़ता है और पृथ्वी से लगभग २०० प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। इसके दोनों तारे एक-दूसरे से लगभग ०.२२ खगोलीय इकाईयों की दूरी पर हैं। दोनों ही तारे हमारे सूरज से छोटे बौने तारे हैं: इनमें से मुख्य तारा नारंगी रंग वाला K श्रेणी का तारा है और दूसरा लाल रंग का M श्रेणी का तारा है। सितम्बर २०११ में वैज्ञानिकों ने घोषणा करी कि इस मंडल में हमारे सौर मंडल के शनि के आकार का एक गैस दानव ग्रह मिला है जो इन दोनों तारों की परिक्रमा कर रहा है। यह पहला ज्ञात ग्रह है जो किसी द्वितारे की परिक्रमा करता पाया गया है और इसका नामकरण कॅप्लर-१६बी किया गया है।[1]

तारों का ब्यौरा[संपादित करें]

इस द्वितारा मंडल के दोनों तारे इस प्रकार हैं:

  • मुख्य तारा: K श्रेणी नारंगी बौना तारा जिसका द्रव्यमान (मास) सूरज के द्रव्यमान का ०.६८९७ गुना और व्यास (डायामीटर) सूरज के व्यास का ०.६४८९ गुना है।
  • साथी तारा: M श्रेणी का लाल बौना तारा जिसका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान का ०.२०२५५ गुना और व्यास सौर व्यास का ०.२२६२३ गुना है।

ग्रह[संपादित करें]

अगर कॅप्लर-१६बी ग्रह पर खड़ा हुआ जा सकता तो कभी आकाश में बड़ा नारंगी सूरज उदय होता दिखता, कभी छोटा लाल सूरज और कभी दोनों एक साथ। ऐसा भी होता की कभी एक सूरज दूसरे के पीछे ग्रहण होता। जब वैज्ञानिकों को इस बात का ज्ञान हुआ तो इस ग्रह की तुलना फ़ौरन स्टार वॉर्स नामक मशहूर विज्ञान कथा (साईन्स फ़िक्शन) फ़िल्म से की गई जिसमें एक टैटूईन (Tatooine) नामक ग्रह दो सूरजों के साथ दर्शाया गया था।

कॅप्लर-१६बी पत्थर और गैस का बना हुआ है। यह अपने दो सूरजों की एक परिक्रमा लगभग २२९ दिनों में पूरी कर लेता है। माना जाता है कि ग्रह पर बहुत सर्दी है और तापमान -७० सेंटीग्रेड से -१०० सेंटीग्रेड तक रहता हैं।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Dennis Overbye (September 15, 2011). "NASA Detects Planet Dancing With a Pair of Stars". http://www.nytimes.com/2011/09/16/science/space/16planet.html. "... The two stars are about 20 million miles apart and produce two eclipses every 41 days as they take turns going in front of each other. One star is about two-thirds the mass of the Sun, the other about a fifth of the Sun ..."