कुइयाँजान

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कुइयाँजान  
अंतरनाद

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|caption= मुखपृष्ठ |label1= लेखक |data1= नासिरा शर्मा |label2= मूल शीर्षक |data2= |label3= अनुवादक |data3= |label4= चित्र रचनाकार |data4= |label5= आवरण कलाकार |data5= |label6= देश |data6= भारत |label7= भाषा |data7= हिन्दी |label8= शृंखला |data8= |label9= विषय |data9= (साहित्य) |label10= प्रकार |data10= |label11= प्रकाशक |data11= सामयिक प्रकाशन |label12= प्रकाशन तिथि |data12= २००५ |label13= हिन्दी में
प्रकाशित हुई |data13= |label14= मीडिया प्रकार |data14= |label15= पृष्ठ |data15= ४१६ |label17= आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ |data17 = ८१-७१३८-०८७-५ |label18= ओसीएलसी क्र. |data18= |label19= पूर्ववर्ती |data19= |label20= उत्तरवर्ती |data20= }}

कुइयाँजान नासिरा शर्मा का एक प्रसिद्ध उपन्यास है। कुइयाँ अर्थात वह जलस्रोत जो मनुष्य की प्यास आदिम युग से ही बुझाता आया है। आमतौर पर हिंदी के लेखकों पर आरोप लगता रहा है कि वे जीवन की कड़वी सच्चाइयों और गंभीर विषयों की अनदेखी करते रहे हैं। हालांकि यदाकदा इसका अपवाद भी मिलता रहा है। लेकिन नासिरा शर्मा की नई पुस्तक कुइयाँजान इन आरोपों का जवाब देने की कोशिश के रूप में सामने आती है। पानी इस समय हमारे जीवन की एक बड़ी समस्या है और उससे बड़ी समस्या है हमारा पानी को लेकर अपने पारंपरिक ज्ञान को भूल जाना। फिर इस बीच सरकारों ने पानी को लेकर कई नए प्रयोग शुरू किए हैं जिसमें नदियों को जोड़ना प्रमुख है। बाढ़ की समस्या है और सूखे का राक्षस हर साल मुँह बाये खड़ा रहता है। इन सब समस्याओं को एक कथा में पिरोकर शायद पहली बार किसी लेखक ने गंभीर पुस्तक लिखने का प्रयास किया है। यह तकनीकी पुस्तक नहीं है, बाक़ायदा एक उपन्यास है लेकिन इसमें पानी और उसकी समस्या को लेकर एक गंभीर विमर्श चलता रहता है।