पंकज सुबीर

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परिचय पंकज सुबीर शिक्षा : एम. एससी. रसायन शास्त्र प्रकाशित पुस्तकें ये वो सहर तो नहीं (उपन्यास- भारतीय ज्ञानपीठ, चार संस्करण प्रकाशित), ईस्ट इंडिया कम्पनी (कहानी संग्रह-भारतीय ज्ञानपीठ, दो संस्करण प्रकाशित), महुआ घटवारिन (कहानी संग्रह- सामयिक प्रकाशन), कसाब.गांधी एट यरवदा.इन (कहानी संग्रह- शिवना प्रकाशन, दो संस्करण प्रकाशित), नई सदी का कथा समय (आलोचना ग्रंथ का संपादन), युवा पीढ़ी की प्रेम कथाएँ (कहानी संकलन- भारतीय ज्ञानपीठ, संपादन श्री रवीन्द्र कालिया), नौ लम्बी कहानियाँ (कहानी संकलन- भारतीय ज्ञानपीठ, संपादन श्री रवीन्द्र कालिया), लोकरंगी प्रेमकथाएँ (कहानी संकलन- भारतीय ज्ञानपीठ, संपादन श्री रवीन्द्र कालिया), एक सच यह भी (कहानी संकलन- सामयिक प्रकाशन, संपादन श्रीमती मधु अरोड़ा), हिन्दी कहानी का युवा परिदृश्य (कहानी संकलन-सामयिक प्रकाशन, संपादन श्री सुशील सिद्धार्थ), हँसते-हँसते रोना (व्यंग्य संकलन, संपादन डॉ॰ प्रेम जनमेजय)। सम्मान एवं पुरस्कार उपन्यास ये वो सहर तो नहीं को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा वर्ष 2009 का ज्ञानपीठ युवा पुरस्कार। उपन्यास ये वो सहर तो नहीं को इंडिपेंडेंट मीडिया सोसायटी (पाखी पत्रिका) द्वारा वर्ष 2011 का स्व. जे. सी. जोशी शब्द साधक जनप्रिय सम्मान। उपन्यास ये वो सहर तो नहीं को मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा वागीश्वरी पुरस्कार। कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी वर्ष 2008 में भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार हेतु अनुशंसित। कहानी संग्रह महुआ घटवारिन को कथा यूके द्वारा वर्ष 2013 में लंदन के हाउस ऑफ कामंस के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान। समग्र लेखन हेतु वर्ष 2014 में वनमाली कथा सम्मान अमेरिका तथा कैनेडा में हिन्दी लेखन हेतु विशेष रूप से सम्मानित किया गया। भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित तीन कहानी संकलनों लोकरंगी प्रेम कथाएँ, नौ लम्बी कहानियाँ तथा युवा पीढ़ी की प्रेम कथाएँ में प्रतिनिधि कहानियाँ सम्मिलित। कहानी शायद जोशी कथादेश अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत। पाकिस्तान की प्रमुख साहित्यिक पत्रिका आज ने भारत की कहानी पर केन्द्रित विशेषांक में चार कहानियों का उर्दू अनुवाद प्रकाशित किया। विशेष तीन कहानियों पर हिन्दी फीचर फिल्मों का निर्माण कार्य चल रहा है। एक कहानी कुफ्र पर लघु फिल्म बन कर रिलीज़ हो चुकी है। फिल्मों में गीत लेखन। कहानियाँ, व्यंग्य लेख एवं कविताएँ नया ज्ञानोदय, कादम्बिनी, हँस, व्यंग्य यात्रा, लमही, प्रगतिशील वसुधा, हिंदी चेतना, परिकथा, सुख़नवर, सेतु, वागर्थ, कथाक्रम, कथादेश, समर लोक, संवेद वराणसी, जज्बात, आधारशिला, समर शेष है, लफ्ज़, अभिनव मीमांसा, अन्यथा जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित। इसके अलावा समाचार पत्रों के सहित्यिक पृष्ठों पर भी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दैनिक भास्कर, नव भारत, नई दुनिया, लोकमत आदि हिंदी के प्रमुख समाचार पत्र शामिल हैं। कई कहानियों तथा व्यंग्य लेखों का तेलगू, पंजाबी, उर्दू, राजस्थानी में अनुवाद। दिनकर स्मृति न्यास दिल्ली द्वारा प्रकाशित शोध ग्रंथों ‘समर शेष है २००७’ तथा ‘हुंकार हूं मैं २००८ ’ में ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पर शोध पत्र प्रकाशित। ‘‘हँस’’ में प्रकाशित कहानी ‘‘और कहानी मरती है .....’’ के लिये प्रगतिशील लेखक संघ की सीहोर इकाई ने प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित किया। वर्ष २००३ में जनार्दन शर्मा पुरस्कार प्राप्त हुआ। उत्तरप्रदेश की संस्था नवोन्मेष द्वारा 2011 का नवोन्मेष साहित्य सम्मान। जल रोको आयोजन के तहत पत्रिका संकल्प के संपादन पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विशेष पुरस्कार दिया गया। कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शोध कार्य। इंटरनेट पर ग़ज़ल के व्याकरण को लेकर विशेष कार्य अपने ब्लॉग के माध्यम से। जहाँ पर ग़ज़ल का व्याकरण (अरूज़) सीखने वालों को उसकी जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। इंटरनेट पर हिंदी के प्रचार प्रसार को लेकर विशेष रूप से कार्यरत। सह संपादक : हिंदी चेतना, समन्वयक (भारत) : हिन्दी प्रचारिणी सभा (हिन्दी चेतना), कैनेडा पंकज सुबीर पी.सी. लैब, शॉप नं. ३-४-५-६, सम्राट कॉम्प्लेक्स बेसमेण्ट बस स्टैण्ड के सामने, सीहोर, मध्य प्रदेश ४६६००१ मोबाइल : ०९९७७८५५३९९, दूरभाष : ०७५६२-४०५५४५, ०७५६२-६९५९१८ पंकज सुबीर (व्यक्तिव और कृतित्व) नाम पंकज सुबीर प्रकज सुबीर का नाम देश के युवा कथा‍कारों की सूची में शामिल है अभी कुछ दिनों पहले ही भारतीय ज्ञानपीठ ने उनको उनके उपन्‍यास के लिये ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्‍कार देने की घोषणा की है। पंकज सुबीर इंटरनेट पर ग़जल़ गुरू के नाम से प्रसिद्ध हैं क्‍योंकि वे ग़ज़ल के व्‍याकरण पर अपना ब्‍लाग चलाते हैं। कहानी संग्रह 'महुआ घटवारिन और अन्‍य क‍हानियां' के लिये पंकज सुबीर को वर्ष 2012 का 'कथा यूके अंतर्राष्‍ट्रीय इन्‍दू शर्मा कथा सम्‍मान' दिनांक 10 अक्‍टूबर 2013 को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्‍स में सम्‍मान प्रदान किया गया। उपन्यास ये वो सहर तो नहीं को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा वर्ष 2010 का नवलेखन पुरस्कार। कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी वर्ष 2009 में भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरुस्कार हेतु अनुशंसित। कथादेश अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में कहानी शायद जोशी को साँत्वना पुरस्कार। इंडिया टुडे ने मध्यप्रदेश के युवा साहित्यकारों पर केन्द्रित विशेष आलेख में प्रमुख स्थान दिया। वर्ष 2009 में कहानी महुआ घटवारिन विशेष रूप से चर्चा में आई तथा हंस, आधारशिला एवं नया ज्ञानोदय ने इस कहानी को लेकर आलेख तथा कहानी का प्रकाशन हुआ। वर्ष 2010 में नया ज्ञानोदय के युवा विशेषांक में प्रकाशित कहानी चौथमल मास्साब और पूस की रात को काफी सराहना मिली। कहानियाँ, व्यंग्य लेख एवं कविताएँ नया ज्ञानोदय, कादम्बिनी, हँस, परिकथा, सुंखनवर, सेतु, वागर्थ, कथाक्रम, कथादेश, समर लोक, संवेद वराणसी, जज्बात, आधारशिला, समर शेष है, लफ जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित। इसके अलावा समाचार पत्रों के सहित्यिक पृष्ठों पर भी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दैनिक भास्कर, नव भारत, नई दुनिया आदि हिंदी के प्रमुख समाचार पत्र शामिल हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास दिल्ली द्वारा प्रकाशित शोध ग्रंथों 'समर शेष है 2007' तथा 'हुंकार हूं मैं 2008 ' में 'संस्कृति के चार अध्याय' पर शोध पत्र प्रकाशित। भारतीय भाषा परिषद ने लगातार दो वर्षों तक (2005 एवं 2006) युवा कथाकारों के विशेषांक में शामिल किया। तथा देश के प्रतिष्ठित भारतीय ज्ञानपीठ ने वर्ष 2007 की युवा लेखकों के विशेषांक में स्थान दिया। हँस में प्रकाशित कहानी और कहानी मरती है।.... के लिये प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित। वर्ष 2003 में सुकवि पंडित जनार्दन शर्मा पुरुस्कार प्राप्त हुआ। जल रोको आयोजन के तहत पत्रिका संकल्प के संपादन पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विशेष पुरुस्कार दिया गया। कहानियों 'घेराव' तथा 'राम जाने' का तेलगू तथा ऑंसरिंग मशीन का पंजाबी में अनुवाद। कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शोध कार्य। इंटरनेट पर ंगाल के व्याकरण को लेकर विशेष कार्य अपने ब्लॉग के माध्यम से। जहां पर ंगाल का व्याकरण (अरूा) सीखने वालों को उसकी जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। इंटरनेट पर हिंदी के प्रचार प्रसार को लेकर विशेष रूप से कार्यरत। सीहोर के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से विज्ञान में स्नातक उपाधि तथा रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि बरकत उल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा प्राप्त की। उसके पश्चात पत्रकारिता से लगाव होने के चलते दैनिक जागरण, साँध्य दैनिक प्रदेश टाइम्स, सहारा समय जैसे समाचार पत्रों तथा चैनलों के लिये पत्रकारिता की। उसी दौरान पत्रकारिता के कड़वे अनुभवों के कारण इंटरनेट पर आधारित अपनी स्वयं की समाचार सेवा सुबीर संवाद सेवा प्रारंभ की। इंटरनेट पर आधारित ये एजेंसीं आज कई सारे समाचार पत्रों तथा चैनलों को समाचार प्रदान करने का कार्य करती है। फ्रीलांस पत्रकारिता के दौरान आजतक, स्टार न्यूज तथा एनडीटीवी जैसे चैनलों के लिये कई समाचारों पर कार्य किया। 2000 में स्वयं के कम्प्यूटर प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की। वर्तमान में फ्रीलांस पत्रकारिता के साथ साथ कम्प्यूटर हार्डवेयर, नेटवर्किंग तथा ग्राफिक्स प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। एक उपन्यास ये वो सहर तो नहीं तथा कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशन। संप्रति : कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का संचालन

1.1 जीवन परिचय जन्म दिनाँक 11 अक्टूबर 1975 को मध्यप्रदेश के होशँगाबाद जिले के सीवनी मालवा कस्बे में हुआ। पिता के शासकीय सेवा में चिकित्सक होने के कारण मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में शिक्षा दीक्षा हुई। उसमें भी अधिकाँश सीहोर जिले में। प्राथमिक शिक्षा शाजापुर जिले के सुसनेर कस्बे में, उौन तथा सीहोर जिले के आष्टा कस्बे में हुई। माध्यमिक तथा हाईस्कूल शिक्षा सीहोर जिले के ही छोटे से कस्बे इछावर में हुई। तत्पश्चात सीहोर के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से विज्ञान में स्नातक उपाधि तथा रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि बरकत उल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा प्राप्त की। उसके पश्चात पत्रकारिता से लगाव होने के चलते दैनिक जागरण, साँध्य दैनिक प्रदेश टाइम्स, सहारा समय जैसे समाचार पत्रों तथा चैनलों के लिये पत्रकारिता की। उसी दौरान पत्रकारिता के कड़वे अनुभवों के कारण इंटरनेट पर आधारित अपनी स्वयं की समाचार सेवा सुबीर संवाद सेवा प्रारंभ की। इंटरनेट पर आधारित ये एजेंसीं आज कई सारे समाचार पत्रों तथा चैनलों को समाचार प्रदान करने का कार्य करती है। 2000 में स्वयं के कम्प्यूटर प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की। वर्तमान में फ्रीलांस पत्रकारिता के साथ साथ कम्प्यूटर हार्डवेयर, नेटवर्किंग तथा ग्राफिक्स प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। 1.2 माता-पिता माता श्रीमती संतोष पुरोहित तथा पिता डॉ॰ प्रमोद कुमार पुरोहित 1.3 विद्यार्थी जीवन का संघर्ष पिता के शासकीय सेवा में होने के कारण सबसे पहले तो यायावर की तरह शिक्षा लेनी पड़ी। उसमें भी प्राथमिक तथा हाईस्कूल की शिक्षा आष्टा तथा इछावर जैसे कस्बों में हुई जहां पर सुविधाओं का नितांत अभाव था। महाविद्यालयीन शिक्षा के लिये जिला मुख्यालय सीहोर जाना पड़ा क्योंकि इछावर में महाविद्यालय नहीं था। स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा रोज इछावर से सीहोर आना जाना करके करनी पड़ी। आने जाने में ही रोज करीब तीन चार घंटे का समय व्यर्थ हो जाता था। चिकित्सा शिक्षा महाविद्यालय में प्रवेश के लिये प्रवेश परीक्षा देने के कारण बी.एससी. द्वितीय वर्ष की परीक्षा नहीं दी, उधर चिकित्सा महाविद्यालय में भी प्रवेश नहीं हो पाने के कारण एक वर्ष गहन नैराश्य में बीता उससे उबरते हुए पुन: स्नातक तथा स्नातकोत्तर परीक्षाएँ दीं और उत्तीर्ण कीं। 1.4 शिक्षा बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल के अंतर्गत आने वाले शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (अब चंद्रशेखर आज़ाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय) से जीव विज्ञान विषयों में स्नातक उपाधि तथा उसके बाद वहीं से रसायन शास्त्र (अकार्बनिक रसायन शास्त्र) में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। 1.5 जीवन के सुखद एवं दु:खद प्रसंग जीवन का लम्बा समय सीहोर के इछावर कस्बे में बिताने के बाद जब उसे छोड़ना पड़ा तो काफी दु:खद रहा वो विछोह। वो शहर जहां लगभग पूरा बचपन बीता और अधिकांश विद्यालयीन तथा महाविद्यालयीन शिक्षा वहीं रह कर पूरी की। आज भी इछावर कहानियों में कविताओं में आ जाता है। सबसे सुखद क्षण वो था जब अपनी पहली कहानी को दैनिक भास्कर समाचार पत्र की पत्रिका मधुरिमा में प्रकाशित देखा। उसके बाद जब भारतीय ज्ञानपीठ ने कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी को नवलेखन पुरुस्कार के लिये अनुशंसित किया तथा उसका प्रकाशन किया। नई दिल्ली के हिंदी भवन के सभागार में देश के दिग्गज साहित्यकारों के बीच कहानी संग्रह के विमोचन का अवसर भी जीवन के सुखद प्रसंगों में शामिल है। 1.6 वैवाहिक जीवन

रेखा से विवाह। दो बेटियों परी तथा पंखुरी के आगमन ने वैवाहिक जीवन को और सुखमय बना दिया। 

1.7 लेखकीय प्रेरणा संभवत: स्कूल के दिनों में ही लेखन के तो नहीं हां पढ़ने के संस्कार ज़रूर मिल गये थे। माताजी को पढ़ने का बहुत शौक है। उनके कारण घर में सभी प्रकार की पुस्तकें आती थीं। इनमें साहित्यिक पत्रिकाओं से लेकर उपन्यास आदि भी शामिल हैं। उन्हीं पत्रिकाओं तथा उपन्यासों को पढ़ पढ़ कर साहित्य के संस्कार मिले। पहली बार जिस कहानी ने सबसे यादा प्रभावित किया वो थी श्री फणीश्वर नाथ रेणू की कहानी लाल पान की बेगम, ये कहानी कोर्स की किसी पुस्तक में शामिल थी। कहानी ने इतना यादा प्रभावित किया कि उसे कई बार पढ़ा और आज भी ये कहानी सबसे पसंदीदा कहानियों में है। उस समय पढ़े गये रूमानी उपन्यासों जिनमें अधिकांश गुलशन नंदा के थे, ने भी लेखन की ओर झुकाया। फिर श्री कमलेश्वर जी, श्री रवीन्द्र कालिया जी, श्री मोहन राकेश, श्रीमती ममता कालिया जी, श्रीमती मन्नू भंडारी जी जैसे साहित्यकारों को पढ़ा और कब स्वयं भी कहानियां लिखने लगा पता नहीं। लेखकीय प्रेरणा का यदि कोई एक कारण ढूंडा जाये तो वो है पढ़ने की आदत, आज भी ये आदत किसी लत की तरह है। 1.8 कृतित्व अब तक सौ से यादा साहित्यिक रचनाएँ जिनमें कहानियाँ, कविताएँ, ग़ज़लें, लेख तथा व्यंग्य लेख शामिल हैं देश भर की शीर्ष साहित्यिक पत्रिकाओं हंस, वागर्थ, नया ज्ञानोदय, कथाक्रम, आधारशिला, जबात, सेतु, लफ, संवेद वाराणसी, समरलोक, कादम्बिनी, अर्बाबे कलम, में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा समाचार पत्रों के सहित्यिक पृष्ठों पर भी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दैनिक भास्कर, नव भारत, नई दुनिया आदि हिंदी के प्रमुख समाचार पत्र शामिल हैं। भारतीय भाषा परिषद की पत्रिका वागर्थ ने लगातार दो वर्षों तक युवा विशेषांक में देश के प्रतिनिधि युवा कथाकार के रूप में चयन किया, भारतीय ज्ञान पीठ की पत्रिका ने एक बार देश भर के प्रतिनिधि युवा कथाकारों के विशेषांक में स्थान दिया। आचार्य रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास दिल्ली द्वारा प्रकाशित स्मारिका में दो वर्षों से संस्कृति के चार अध्याय पर शोध पत्र प्रकाशित। पार्श्व गायिका सुश्री लता मंगेशकर पर लिखे गये कई शोधात्मक लेख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। ग़ज़ल के व्याकरण तथा तकनीक पर काफी कार्य किया है। कहानी आंसरिंग मशीन का पंजाबी में तथा घेराव का तेलगू में अनुवाद किया गया है। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के कार्यक्रमों में कहानी पाठ तथा ग़ज़ल पाठ किया। 1.8.1 कहानी संग्रह वर्ष 2009 में प्रथम कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी का प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा किया गया। 1.8.2 उपन्यास उपन्यास ये वो सहर तो नहीं को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा 1.8.3 अन्य रचनाएँ एक व्यंग्य संग्रह बुध्दिजीवी सम्मेलन ग़ज़ल के व्याकरण पर एक पुस्तक तथा खंड काव्य तुम्हारे लिये प्रकाशन की प्रक्रिया में। 1.9 कर्म क्षेत्र के विविध आयाम कम्प्यूटर प्रशिक्षण के साथ फ्रीलाँस पत्रकारिता कर्मक्षेत्र। पिछले कुछ सालों से एक अलग प्रकार के काम से जुड़े हैं। ये कार्य है इंटरनेट के माध्यम से नये लिखने वालों को हिंदी ग़ज़ल लिखने के बारे में तकनीकी जानकारी तथा सहायता प्रदान करना। ये कार्य खूब लोकप्रिय हुआ है तथा आज दुनिया भर के देशों में रहने वाले भारतीय इंटरनेट के माध्यम से ग़ज़ल लिखना, कविताएँ लिखना सीख रहे हैं। ये कार्य बहुत संतोष प्रदान करता है। साहित्य के क्षेत्र में तकनीक एवं प्रोद्यौगिकी के उपयोग पर जोर। इंटरनेट की दुनिया में ग़ज़ल गुरू के नाम से मशहूर। फ्रीलांस पत्रकारिता के दौरान आजतक, स्टार न्यूज तथा एनडीटीवी जैसे चैनलों के लिये कई समाचारों पर कार्य किया। कवि तथा शायर के रूप में देश भर के कई अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों तथा मुशायरों में काव्य पाठ किया। इंटरनेट तकनीक का उपयोग करते हुए कई आन लाइन कवि सम्मेलनों का भी आयोजन किया जिनमें दुनिया भर के हिंदी कवियों ने काव्य पाठ किया। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिये इंटरनेट पर कार्यरत। जल संरक्षण पर एक नदी की कथा संकल्प नाम की पत्रिका का संपादन मध्यप्रदेश शासन के लिये किया। 1.10 पुरुस्कार एवं सम्मान संकल्प पत्रिका के संपादन के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सम्मान। हंस में प्रकाशित कहानी और कहानी मरती है के लिये प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा सम्मान प्रदान। पंडित जनार्दन शर्मा स्मृति कविता सम्मान। कहानी संग्रह ईस्ट इंडिया कम्पनी ज्ञानपीठ नवलेखन के लिये अनुशंसित।