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कुं. वीरभद्रप्पा कन्नड़ भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यासअरमने के लिये उन्हें सन् 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1]