कच्छपघात राजवंश

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कच्छपघात राजवंश के स्थापत्यों की स्थिति[1]

कच्छपघात राजवंश (Kachchhapaghata dynasty) भारत का एक राजवंश था जिसने 10वीं से 12वीं शताब्दी ईसवी काल में मध्य भारत (आधुनिक मध्य प्रदेश) के पश्चिमोत्तरी भागों में शासन करा।[2]

इतिहास[संपादित करें]

"कच्छपघात" का अर्थ "कछुआ मारने वाला" होता है। यह वंश पहले गुर्जर प्रतिहार राजवंश और चन्देल राजवंश के अधीन हुआ करता था। पश्चिमोत्तर से होने वाले महमूद ग़ज़नवी के हमले में हुई चंदेल राजा विद्याधर की मृत्यु के बाद चंदेल राज्य कमज़ोर होने लगा। कच्छपघातों ने तब स्वयं को उनसे अलग करा और राज करने लगे। ढोला-मारू की लोककथा के अनुसार वंश का अंतिम राजा तेजसकर्ण था जो सन् 1128 में पड़ोसी राजा की पुत्री से विवाह करने जाने के लिए ग्वालियर छोड़ा। उसने अपनी अनुपस्थिति में ग्वालियर दुर्ग परमल देव के हवाले किया लेकिन वापस आने पर परमल देव ने बागडोर लौटाने से मना कर दिया और परिहर वंश आरम्भ करा जिसका शासन 103 वर्षों तक चल्ल।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Om Prakash Misra 2003, पृ॰ 15.
  2. "Exploration Of Kadwaha, District Ashoknagar, Madhya Pradesh (2009-2010)". Bhopal: Archaeological Survey of India (Temple Survey Project). अभिगमन तिथि 9 May 2016.
  3. Henry Miers Elliot (1869). Memoirs on the History, Folk-Lore, and Distribution of the Races of the North Western Provinces of India. Trübner & co. पृ॰ 158.