आत्मकथा

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आत्मकथा हिन्दी साहित्य में गद्य की एक विधा है।

आत्मकथा में व्यक्ति स्वंय अपने जीवन की कथा स्मृतियों के आधार पर लिखता है. आत्मकथा में निष्पक्षता आवश्यक है. गुपा दोषों का तटस्थ विश्लेषण तथा काल्पनिक बातों घटनाओं से बचाना चाहिए. इसके अतिरिक्त प्रवाह व रोचकता भी आवश्यक है.

हिंदी का प्रथम आत्मकथा बनारसीदास जैन कृत अर्द्धकथानक है.[संपादित करें]

भारतेंदु कृत कुछ आप बीती कुछ जग बीती डॉ राजेन्द्र प्रसाद की आत्मकथा, राहुल सांकृत्यायन की मेरी जीवन गाथा के अतिरिक्त डॉ, हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा जी चार खण्डों में है. क्या भूलूँ क्या याद करूँ. नींड का निर्माण फिर-फिर, बसेरे से दूर, दश द्वार से सोपान तक, प्रसिद्ध लोकप्रिय आत्मकथाए है.