आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने

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आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने वैद्यनाथ मिश्र उर्फ़ नागार्जुन की रचना है। इसका प्रकाशन वाणी प्रकाशन पर १९९९ में हुआ।

सारांश[संपादित करें]

यह एक कविता संग्रह है जिसमें उनका प्रकृति प्रेम उल्लेखित किया गया है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]