अजिंक्यतारा

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अजिंक्यतारा
Part of पहले मराठा साम्राज्य , अब महाराष्ट्र
सातारा जिला, महाराष्ट्र
(सतारा के पास )
निर्देशांक17°24′N 73°35′E / 17.40°N 73.59°E / 17.40; 73.59
ऊँचाई1,356 मीटर (4,400 फीट) ASL
निर्माण जानकारी
स्वामित्वभारत सरकार
जनता हेतु
खुला
हा
गैरिसन जानकारी
पूर्व
कमांडर
शिवाजी
वर्तमान निवासीशाहु

अजिंक्यतारा महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित किला है।अजिंक्‍यतारा की उंचाई लगभग ३०० मीटर है। उसका दक्षिणोत्तर विस्तार ६०० मीटर है। आज इस किले पर वृक्षारोपण जैसे अनेक सामाजिक कार्यक्रम लिए जाते हैं।

कैसे जाना ? अजिंक्‍यतारा किला सातारा शहर में ही होने से शहरासे अनेक मार्ग द्वारा किले पर जाया जा सकता है। सातारा एस.टी. स्थानक से अदालत बाजार मार्ग से जानेवाली कोई भी गाडीसे अदालत बाडे पर उतरकर किलेपर जा सकते हैं। दुपहिया से भी अजिंक्यातारा पर जा सकते हैं। सातारा से राजवाडा एेसी बससेवा हर १०-१५ मिनिट में उपलब्ध है।’राजवाडा’ बस स्थानक से अदालत बाड्डा तक चलते हुए आने के लिए १० मिनिट लगते हैं। अदालत बाडे के बाजूसे जो मार्ग है वही पर किले पर जानेवाली गाडी रस्तेपर लगती है। उस रस्ते से १ कि.मी. चलते हुए जाने पर व्यक्ति दरवाजे के पास पहुँचता है। अजिंक्‍यतारा किले पर जाने के लिए सीधा गाडी रस्ता भी है।सुद्धा आहे. गोडोली नाका परिसर से भी कोई भी मार्ग से किलेपर जा सकते हैं। कही से भी जाने पर लगभग एक घन्टा समय लगता है। किलेपर सुबह चढकर जाना स्वास्थ की दृष्टी से अच्छा है।

इतिहास- सातारा का किला (अजिंक्‍यतारा) मतलब मराठो की चौथी राजधानी। पहली राजगड फिर रायगड उसके बाद जिंजी और चौथी अजिंक्‍यतारा। सातारा का किला

ये शिलाहार वंश के दुसरे भोजराजाने इ.स. ११९० में बांधा। आगे यह किला बहामनी सत्ता के पास और फिर बिजापूर के आदिलशाह के पास गया।इ.स.१५८० में पहले आदिलशहा की पत्‍नी चांदबिबी यहाँ कैद में थी। शिवाजी के राज्य का विस्तार होते समय २७ जुलाई १६७३ में यह किला शिवाजी महाराज के हाथ आया इस किलेपर शिवराया को ज्वर आने के कारण दो महिने विश्रांती लेनी पडी। शिवाजी महाराज की मृत्यु के पश्चात १६८२ में औरंगजेब महाराष्ट्र में आयी। इ.स. १६९९ में औरंगजेब ने सातारा के दुर्ग को घेरा। उस समय किले के किलेदार प्रयागजी प्रभू थे। १३ एप्रिल १७०० की सुबह मुघलाे ने सुरुंग लगाने के कारण दाे सुरंग खोदी और बत्ती देते ही क्षणभर में मंगलाई का बुरूज आकाश में गया। तट पर के कुछ मराठे मारे गए इतने में दूसरा स्फोट हुआ। बड़ा तट आगे घुसनेवाले मुगलो पर गिरा व देढ हजार मुघल सैनिक मारे गए। किले पर सब बारूद, खाद्यपदार्थ खत्म हुए और २१ अप्रे को किला सुभानजीने जिता। किले पर मोगली निशाण लहराने के लिए साडेचार महिने लगे। किल्ल्याचे नामकरण आझमतारा झाले .ताराराणीच्या सैन्याने पुन्हा किल्ला जिंकला व त्याचे नामातंर अजिंक्‍यतारा केले., पण पुन्हा किल्ला मोगलांच्या स्वाधीन झाला. मात्र १७०८ मध्ये शाहूने फितवून किल्ला